कोटा डायरी: शिक्षा के हब में संस्कृति का नया रंग
कोटा डायरी के इस विशेष अंक में आज हम बात करेंगे उस शहर की, जिसे भारत की ‘कोचिंग कैपिटल’ कहा जाता है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्र जब अपनी किताबों से बाहर निकलते हैं, तो उन्हें क्या देखने को मिलता है? हाल ही में Motion Education ने एक ऐसी ही शानदार पहल की है, जिसने शिक्षा के पारंपरिक तरीकों को एक नया डायमेंशन दिया है। मोशन एजुकेशन द्वारा आयोजित ‘हेरिटेज वॉक’ ने कोटा की पुरानी गलियों में ज्ञान और मनोरंजन का एक बेहतरीन कॉम्बिनेशन पेश किया है।
किताबों से परे: क्यों जरूरी है हेरिटेज वॉक?
कोटा में हर साल लाखों छात्र JEE और NEET जैसी कठिन परीक्षाओं की तैयारी के लिए आते हैं। यहाँ का शेड्यूल काफी टाइट होता है और छात्र अक्सर स्ट्रेस महसूस करते हैं। इसी मानसिक दबाव को कम करने और छात्रों को कोटा के समृद्ध इतिहास से जोड़ने के लिए Motion Education के संस्थापक Nitin Vijay (NV Sir) ने इस हेरिटेज वॉक की प्लानिंग की।
इस वॉक का मुख्य उद्देश्य छात्रों को केवल ‘एकेडमिक्स’ तक सीमित न रखकर उन्हें होलिस्टिक डेवलपमेंट की ओर ले जाना था। जब छात्र कोटा की पुरानी गलियों में निकले, तो उन्हें अहसास हुआ कि यह शहर सिर्फ कोचिंग सेंटर्स का नहीं, बल्कि गौरवशाली इतिहास और अद्भुत आर्किटेक्चर का भी केंद्र है।
कोटा की गलियों में इतिहास का सफर
इस वॉक की शुरुआत सुबह-सुबह हुई, जब मौसम काफी प्लेजेंट था। छात्रों के ग्रुप ने कोटा के पुराने इलाकों, जैसे कि लाडपुरा और पाटनपोल की सैर की। यहाँ के पुराने महलों और हवेलियों को देखकर छात्र दंग रह गए।
- गढ़ पैलेस: छात्रों ने कोटा के प्रसिद्ध गढ़ पैलेस की वास्तुकला को समझा, जहाँ राजपूत और मुगल शैली का अनोखा फ्यूजन देखने को मिलता है।
- चित्रशाला: यहाँ की पेंटिंग्स और आर्टवर्क ने छात्रों को इतिहास के पन्नों में ले जाकर एक अमेजिंग एक्सपीरियंस दिया।
- लोकल मार्केट: कोटा के पुराने बाजारों की रौनक और वहां की वाइब ने छात्रों को घर की याद दिला दी और उन्हें शहर के साथ जोड़ा।
स्वाद का तड़का: कोटा की मशहूर कचोरी और मिठाइयाँ
बिना स्वाद के कोई भी सफर अधूरा है। इस हेरिटेज वॉक में छात्रों ने न केवल इतिहास को जाना, बल्कि कोटा के मशहूर स्ट्रीट फूड का भी लुत्फ उठाया। कोटा की ‘हींग वाली कचोरी’ पूरी दुनिया में मशहूर है और जब छात्रों ने इसे गरमा-गरम चखा, तो उनके चेहरे की खुशी देखते ही बनती थी।
Motion Education ने यह सुनिश्चित किया कि छात्रों को बेहतरीन क्वालिटी का खाना मिले। कचोरी के साथ-साथ वहाँ की ट्रेडिशनल मिठाइयों ने इस वॉक को और भी स्पेशल बना दिया। छात्रों ने कहा कि हॉस्टल के खाने से हटकर यह एक बहुत ही रिफ्रेशिंग चेंज था।
स्टूडेंट वेलफेयर और मेंटल हेल्थ पर फोकस
आजकल के कॉम्पिटिटिव दौर में छात्रों की मेंटल हेल्थ एक बड़ा विषय है। मोशन एजुकेशन हमेशा से ही छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य को लेकर प्रोएक्टिव रहा है। नितिन विजय सर का मानना है कि ‘एक स्वस्थ दिमाग ही बड़ी चुनौतियों को पार कर सकता है।’
इस इवेंट के दौरान कई मोटिवेशनल सेशन्स भी हुए, जहाँ छात्रों को यह सिखाया गया कि पढ़ाई और जीवन के बीच बैलेंस कैसे बनाया जाए। यह वॉक केवल घूमने-फिरने के लिए नहीं थी, बल्कि यह छात्रों के लिए एक लर्निंग प्रोसेस भी थी, जहाँ उन्होंने टीम बिल्डिंग और कम्युनिकेशन स्किल्स सीखीं।
Motion Education की हेरिटेज वॉक का मुख्य विवरण
यहाँ इस आयोजन की कुछ प्रमुख जानकारियाँ दी गई हैं:
| फीचर / विवरण | महत्वपूर्ण जानकारी |
|---|---|
| आयोजक | Motion Education, Kota |
| मुख्य अतिथि/मार्गदर्शक | Nitin Vijay (NV Sir) |
| प्रमुख लोकेशन | पुराना कोटा, गढ़ पैलेस, लोकल मार्केट |
| मुख्य आकर्षण | कोटा की कचोरी, ऐतिहासिक वास्तुकला, कल्चरल इंटरैक्शन |
| उद्देश्य | स्ट्रेस रिलीफ और कल्चरल अवेयरनेस |
नितिन विजय सर का विजन: ‘शिक्षा में नयापन’
मोशन एजुकेशन के CEO, नितिन विजय सर ने मीडिया से बात करते हुए कहा, “हम चाहते हैं कि कोटा आने वाला हर छात्र यहाँ से केवल एक डिग्री या रैंक लेकर न जाए, बल्कि वह यहाँ की संस्कृति और जीवन के मूल्यों को भी समझे। एजुकेशन सिस्टम में इस तरह के इनोवेटिव बदलावों की बहुत जरूरत है। हमारा लक्ष्य छात्रों को कॉन्फिडेंट और वेल-राउंडेड पर्सनैलिटी बनाना है।”
छात्रों का फीडबैक: एक यादगार अनुभव
वॉक में शामिल होने वाले छात्रों का उत्साह सातवें आसमान पर था। एक NEET एस्पिरेंट ने बताया, “मैं पिछले 6 महीनों से सिर्फ अपने कमरे और क्लासरूम के बीच घूम रही थी। इस Heritage Walk ने मुझे एक नई एनर्जी दी है। अब मैं दोगुनी ताकत से अपनी पढ़ाई पर फोकस कर पाऊँगी।”
एक अन्य छात्र ने कहा, “कोटा को लेकर हमेशा मन में एक इमेज थी कि यहाँ सिर्फ पढ़ाई होती है, लेकिन यहाँ का कल्चर इतना रिच है, यह आज पता चला। मोशन एजुकेशन की यह स्ट्रेटजी वाकई काबिले तारीफ है।”
निष्कर्ष: भविष्य की राह
मोशन एजुकेशन की यह पहल अन्य कोचिंग संस्थानों के लिए एक बेंचमार्क सेट करती है। शिक्षा केवल किताबों को रटने का नाम नहीं है, बल्कि दुनिया को देखने और समझने का नाम भी है। इस तरह के आयोजनों से छात्रों के बीच पॉजिटिविटी बढ़ती है और वे खुद को समाज से कटा हुआ महसूस नहीं करते।
TimesNews360 की टीम इस सराहनीय कदम के लिए मोशन एजुकेशन को बधाई देती है। उम्मीद है कि भविष्य में भी इस तरह के क्रिएटिव इवेंट्स आयोजित होते रहेंगे, ताकि हमारे देश का भविष्य यानी हमारे छात्र मानसिक और बौद्धिक रूप से मजबूत बन सकें। कोटा की ये गलियां अब न केवल ज्ञान बाँट रही हैं, बल्कि इतिहास और संस्कृति की धरोहर को भी संजो रही हैं।
