ग्लोबल मार्केट में भारत की धमक: क्या है पूरा मामला?
हाल ही में एक कार्यक्रम के दौरान पीयूष गोयल ने बताया कि भारत वर्तमान में यूरोपीय संघ (EU) और संयुक्त राज्य अमेरिका (US) जैसे विकसित देशों के साथ अपनी व्यापारिक साझेदारी को नई ऊंचाइयों पर ले जा रहा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि इन विकसित देशों की अर्थव्यवस्थाएं मिलकर 55-60 ट्रिलियन डॉलर का एक विशाल बाजार बनाती हैं। यदि भारत इन देशों के साथ सफल व्यापार समझौते (Trade Deals) करने में कामयाब रहता है, तो भारतीय निर्यातकों, स्टार्टअप्स और मैन्युफैक्चरर्स के लिए विकास की असीम संभावनाएं खुल जाएंगी।
अमेरिका और यूरोपीय संघ (EU) के साथ व्यापारिक समझौतों की अहमियत
भारत और यूरोपीय संघ के बीच ‘मुक्त व्यापार समझौते’ (Free Trade Agreement – FTA) को लेकर बातचीत काफी समय से चल रही है। पीयूष गोयल का मानना है कि ये डील्स केवल कागजी समझौते नहीं हैं, बल्कि ये भारत के करोड़ों युवाओं के लिए रोजगार और देश की जीडीपी में बड़े उछाल का जरिया बनेंगी।
- बाजार पहुंच: इन समझौतों के बाद भारतीय टेक्सटाइल, हैंडिक्राफ्ट, फार्मास्यूटिकल्स और आईटी सेवाओं को विकसित देशों के बाजारों में बिना किसी भारी टैक्स के एंट्री मिल सकेगी।
- निवेश में बढ़ोतरी: अमेरिका और यूरोप की बड़ी कंपनियां भारत को एक विश्वसनीय मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में देख रही हैं, जिससे प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) में भारी इजाफा होगा।
- सप्लाई चेन का विस्तार: चीन पर वैश्विक निर्भरता कम होने के बाद, दुनिया अब भारत को ‘चाइना प्लस वन’ रणनीति के तहत एक मजबूत विकल्प मान रही है।
भारतीय निर्यातकों के लिए ‘स्वर्ण युग’ की शुरुआत
पीयूष गोयल ने स्पष्ट किया कि भारत अब केवल एक विकासशील देश नहीं, बल्कि वैश्विक व्यापार का एक महत्वपूर्ण केंद्र बनने की ओर अग्रसर है। 55 से 60 ट्रिलियन डॉलर के इस बाजार में सेंध लगाने का मतलब है कि भारत का निर्यात (Exports) आने वाले वर्षों में रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य 2030 तक भारत के कुल निर्यात को 2 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचाना है, जिसमें ये अंतरराष्ट्रीय सौदे गेम-चेंजर साबित होंगे।
निष्कर्ष
पीयूष गोयल का यह बयान भारतीय उद्योगों के लिए एक बड़े प्रोत्साहन की तरह है। यदि भारत सही समय पर इन विकसित अर्थव्यवस्थाओं के साथ तालमेल बिठा लेता है, तो आने वाले दशक में भारत को तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने से कोई नहीं रोक पाएगा। यह न केवल व्यापार के लिहाज से बल्कि आम आदमी की आर्थिक स्थिति सुधारने की दिशा में भी एक क्रांतिकारी कदम होगा।
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