गोंडा बार एसोसिएशन चुनाव की तारीखों का ऐलान
उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले में विधिक राजनीति का पारा चढ़ गया है। गोंडा बार एसोसिएशन के वार्षिक चुनाव की तारीखों की घोषणा कर दी गई है। एल्डर्स कमेटी के निर्णय के अनुसार, इस बार 13 फरवरी को मतदान प्रक्रिया संपन्न होगी। इस चुनाव को लेकर वकीलों के बीच भारी उत्साह देखा जा रहा है, लेकिन इस बार चुनाव आयोग और एल्डर्स कमेटी ने आचार संहिता को लेकर काफी कड़े रुख अपनाए हैं।
बैनर-पोस्टर और इलेक्ट्रिक उपकरणों पर पूर्ण प्रतिबंध
चुनाव को निष्पक्ष और शोर-शराबे से मुक्त रखने के लिए एल्डर्स कमेटी ने एक महत्वपूर्ण फैसला लिया है। एसोसिएशन परिसर और आसपास के क्षेत्रों में किसी भी प्रकार के बड़े बैनर, होर्डिंग या पोस्टर लगाने पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई है। इसके अलावा, चुनाव प्रचार के दौरान किसी भी प्रकार के इलेक्ट्रिक उपकरणों जैसे लाउडस्पीकर या डिजिटल स्क्रीन के उपयोग को प्रतिबंधित किया गया है। समिति का मानना है कि इससे न केवल कचहरी की गरिमा बनी रहेगी, बल्कि फिजूलखर्ची पर भी लगाम लगेगी।
कनिष्ठ उपाध्यक्ष पद के लिए रवि तिवारी ने पेश की दावेदारी
चुनाव की सरगर्मी के बीच उम्मीदवारों ने अपना जनसंपर्क तेज कर दिया है। इसी क्रम में, वरिष्ठ अधिवक्ता रवि तिवारी ने कनिष्ठ उपाध्यक्ष पद के लिए अपना नामांकन दाखिल करने की तैयारी पूरी कर ली है। रवि तिवारी ने अपने समर्थकों के साथ कचहरी परिसर में वकीलों से मुलाकात की और अपने विजन को साझा किया। उन्होंने कहा कि उनका मुख्य उद्देश्य युवा वकीलों की समस्याओं का समाधान करना और बार एवं बेंच के बीच बेहतर तालमेल बिठाना है।
चुनाव का पूरा शेड्यूल और आचार संहिता
एल्डर्स कमेटी के मुताबिक, नामांकन की प्रक्रिया और पत्रों की जांच के बाद पात्र उम्मीदवारों की अंतिम सूची जारी की जाएगी। 13 फरवरी को सुबह से ही मतदान शुरू हो जाएगा, जिसमें बार एसोसिएशन के सभी पंजीकृत सदस्य अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। चुनाव के दौरान सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए जाएंगे और केवल पहचान पत्र दिखाने वाले अधिवक्ताओं को ही मतदान केंद्र में प्रवेश की अनुमति होगी।
- मतदान की तिथि: 13 फरवरी 2024
- मुख्य प्रतिबंध: बैनर, पोस्टर और लाउडस्पीकर पर रोक
- प्रमुख पद: अध्यक्ष, महासचिव, उपाध्यक्ष (कनिष्ठ और वरिष्ठ)
- निगरानी: एल्डर्स कमेटी द्वारा विशेष पर्यवेक्षण
इस चुनाव में इस बार युवा और अनुभवी वकीलों के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिल सकता है। जहाँ अनुभवी वकील अपनी वरिष्ठता और अनुभव के आधार पर वोट मांग रहे हैं, वहीं युवा वर्ग बदलाव और नई तकनीक को अपनाने के नाम पर समर्थन जुटा रहा है। अब देखना यह होगा कि 13 फरवरी को गोंडा के वकील किसके सिर पर जीत का सेहरा बांधते हैं।