हिमाचल प्रदेश में शिक्षा ढांचे का पुनर्गठन: 62 स्कूल होंगे मर्ज
हिमाचल प्रदेश सरकार ने राज्य के शिक्षा विभाग में एक बड़ा सुधारात्मक कदम उठाते हुए 62 सरकारी स्कूलों को मर्ज करने के प्रस्ताव को आधिकारिक मंजूरी दे दी है। यह निर्णय मुख्य रूप से उन स्कूलों के लिए लिया गया है जहाँ छात्रों की संख्या बेहद कम या शून्य थी। सरकार का उद्देश्य शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार करना और संसाधनों का उचित प्रबंधन करना है।
मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री के क्षेत्रों पर भी पड़ा असर
राज्य सरकार के इस कड़े फैसले की खास बात यह है कि इसमें किसी भी प्रकार का राजनीतिक भेदभाव नहीं देखा गया है। विलय होने वाले स्कूलों की सूची में मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू और शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर के निर्वाचन क्षेत्रों में स्थित स्कूल भी शामिल हैं। यह कदम दर्शाता है कि सरकार राज्य में शिक्षा व्यवस्था को युक्तिसंगत बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।
विलय प्रक्रिया के मुख्य बिंदु:
- कम नामांकन वाले प्राथमिक और माध्यमिक स्कूलों को नजदीकी बड़े स्कूलों में मिलाया जाएगा।
- मर्ज किए गए स्कूलों के शिक्षकों को रिक्त पदों वाले अन्य संस्थानों में तैनात किया जाएगा।
- छात्रों को बेहतर बुनियादी ढांचा और प्रतिस्पर्धी शैक्षिक वातावरण प्रदान करने का लक्ष्य है।
- प्रशासनिक व्यय को कम करने और शैक्षणिक संसाधनों के अधिकतम उपयोग पर जोर दिया गया है।
शिक्षा विभाग के अधिकारियों के अनुसार, इस प्रक्रिया से न केवल शिक्षकों की कमी दूर होगी, बल्कि छात्रों को एक ही स्थान पर सभी आवश्यक सुविधाएं मिल सकेंगी। सरकार के इस फैसले से आने वाले समय में प्रदेश की प्राथमिक और उच्च शिक्षा व्यवस्था में बड़े बदलाव की उम्मीद जताई जा रही है।