Bangladesh Political Crisis: चुनाव के बाद अमेरिका और पाकिस्तान हुए एक्टिव, Tarique Rahman बने किंगमेकर?

बांग्लादेश राजनीतिक संकट ने पूरे दक्षिण एशिया की जियोपॉलिटिक्स को एक ऐसे मोड़ पर लाकर खड़ा कर दिया है, जिसकी कल्पना शायद कुछ महीनों पहले किसी ने नहीं की थी। शेख हसीना के अचानक देश छोड़ने के बाद ढाका की गलियों में जो आक्रोश दिखा, उसने सत्ता का पूरा समीकरण ही बदल दिया है। इस बदलाव के बीच अब दुनिया की दो बड़ी शक्तियां—अमेरिका और पाकिस्तान—काफी एक्टिव नजर आ रही हैं। Official Source के अनुसार, बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के कार्यवाहक अध्यक्ष Tarique Rahman को साधने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़ी बिसात बिछाई जा रही है।

Quick Summary of Bangladesh Political Crisis

Main EventDetails
Focus Keywordबांग्लादेश राजनीतिक संकट
Key FigureSheikh Hasina (Ex-PM), Tarique Rahman (BNP)
Current LeaderMuhammad Yunus (Interim Chief)
International PlayersUSA, Pakistan, India, China
Current SituationProtests followed by Interim Government formation

बांग्लादेश राजनीतिक संकट और शेख हसीना का इस्तीफा: क्या है असली वजह?

बांग्लादेश में जो कुछ भी हुआ, उसे केवल एक छात्र आंदोलन कहना शायद गलत होगा। यह सालों से दबे हुए गुस्से का विस्फोट था। शेख हसीना की सरकार पर तानाशाही और विपक्षी आवाजों को दबाने के आरोप लगते रहे थे। जब सरकारी नौकरियों में आरक्षण (Quota System) को लेकर छात्रों ने सड़क पर उतरने का फैसला किया, तो प्रशासन की सख्ती ने आग में घी का काम किया। Speculations तो यह भी हैं कि इस पूरे आंदोलन को बाहर से फंडिंग और लॉजिस्टिकल सपोर्ट मिल रहा था।

5 अगस्त 2024 की वो तारीख इतिहास में दर्ज हो गई जब शेख हसीना को महज 45 मिनट के अंदर ढाका छोड़ना पड़ा। उनके इस्तीफे के बाद बांग्लादेश में ‘पॉवर वैक्यूम’ क्रिएट हो गया, जिसे भरने के लिए अब Tarique Rahman और सेना के बीच एक नई ट्यूनिंग देखी जा रही है।

आंदोलन से तख्तापलट तक का सफर

छात्रों का यह प्रदर्शन ‘Anti-Discrimination Student Movement’ के बैनर तले शुरू हुआ था। लेकिन देखते ही देखते इसमें राजनीतिक दल और कट्टरपंथी संगठन जैसे ‘जमात-ए-इस्लामी’ भी शामिल हो गए। Official Source की मानें तो हसीना सरकार के गिरने के बाद अब देश की कमान नोबेल पुरस्कार विजेता मोहम्मद यूनुस के हाथों में है, लेकिन असली सत्ता की चाबी किसके पास होगी, यह अभी भी एक रहस्य बना हुआ है।

बांग्लादेश राजनीतिक संकट के बीच अमेरिका की ‘Silent Strategy’ और विजन

अमेरिका और शेख हसीना के रिश्ते पिछले कुछ सालों से काफी तनावपूर्ण रहे थे। वाशिंगटन ने बांग्लादेश के चुनावों की पारदर्शिता पर कई बार सवाल उठाए थे और ‘Visa Restrictions’ तक लगा दिए थे। अब जब सत्ता बदल चुकी है, तो अमेरिका की एक्टिवनेस काफी बढ़ गई है। Viral News और कुछ रिपोर्ट्स में यह दावा किया जा रहा है कि अमेरिका सेंट मार्टिन द्वीप (St. Martin’s Island) पर अपना बेस बनाना चाहता है, जिसके लिए शेख हसीना राजी नहीं थीं।

अब अमेरिका की नजरें Tarique Rahman पर हैं। लंदन में निर्वासित जीवन बिता रहे तारिक रहमान को अमेरिका एक ऐसे नेता के रूप में देख रहा है जो बांग्लादेश में उनके हितों की रक्षा कर सके। राजनयिक हलकों में यह चर्चा आम है कि आने वाले समय में अमेरिका बांग्लादेश को आर्थिक मदद के जरिए अपने पाले में लाने की पूरी कोशिश करेगा।

डेमोक्रेसी के नाम पर जियोपॉलिटिकल गेम?

अमेरिका का कहना है कि वह बांग्लादेश में लोकतंत्र की बहाली चाहता है। हालांकि, जानकारों का मानना है कि यह केवल लोकतंत्र की बात नहीं है, बल्कि हिंद महासागर (Indian Ocean) में अपनी मौजूदगी दर्ज कराने की एक सोची-समझी रणनीति है। अमेरिका चाहता है कि बांग्लादेश में ऐसी सरकार हो जो प्रो-वेस्टर्न (Pro-Western) हो, और इस दौड़ में तारिक रहमान सबसे आगे फिट बैठते हैं।

पाकिस्तान और ISI का कनेक्शन: क्या है सच?

बांग्लादेश राजनीतिक संकट के दौरान एक नाम जो सबसे ज्यादा उछला, वो है पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI। भारत के सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस तख्तापलट के पीछे पाकिस्तान का हाथ हो सकता है। Speculations के अनुसार, जमात-ए-इस्लामी के जरिए पाकिस्तान ने बांग्लादेश में अराजकता फैलाने का काम किया।

पाकिस्तान के लिए यह एक सुनहरा मौका है कि वह बांग्लादेश के साथ अपने पुराने रिश्तों को फिर से जीवित करे, जो शेख हसीना के दौर में लगभग खत्म हो चुके थे। Viral News यह भी है कि पाकिस्तान अब Tarique Rahman को सीधे तौर पर सपोर्ट कर रहा है ताकि बांग्लादेश की धरती का इस्तेमाल भारत के खिलाफ किया जा सके।

तारिक रहमान और पाकिस्तान के संबंध

तारीख रहमान की पार्टी BNP का झुकाव हमेशा से पाकिस्तान की तरफ रहा है। जब 2001 से 2006 के बीच BNP सत्ता में थी, तब भारत विरोधी गतिविधियों में काफी इजाफा हुआ था। अब पाकिस्तान फिर से वही पुराना दौर वापस लाना चाहता है। सूत्रों के अनुसार, पाकिस्तानी अधिकारियों ने लंदन में तारिक रहमान से संपर्क साधने की कोशिश की है ताकि भविष्य की सरकार में पाकिस्तान का प्रभाव बना रहे।

तारीख रहमान: क्या लंदन से चलेगी बांग्लादेश की सरकार?

Tarique Rahman पिछले कई सालों से लंदन में रह रहे हैं। उन पर बांग्लादेश में कई आपराधिक मामले दर्ज हैं, लेकिन शेख हसीना के जाने के बाद उनके लिए रास्ते साफ होते दिख रहे हैं। BNP समर्थकों का मानना है कि तारिक ही वो शख्स हैं जो देश को बचा सकते हैं।

Official Source का कहना है कि तारिक रहमान वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अपनी पार्टी के कार्यकर्ताओं को निर्देश दे रहे हैं। वह लगातार विदेशी दूतावासों के संपर्क में हैं। उनका लक्ष्य बहुत साफ है—जल्द से जल्द चुनाव कराना और सत्ता में वापसी करना। लेकिन सवाल यह है कि क्या बांग्लादेश की जनता एक ऐसे नेता को स्वीकार करेगी जो सालों से देश से बाहर है?

किंगमेकर की भूमिका में तारिक

भले ही मोहम्मद यूनुस अभी अंतरिम सरकार के प्रमुख हैं, लेकिन राजनीतिक जमीन पर पकड़ BNP की ही है। अगर जल्द चुनाव होते हैं, तो तारिक रहमान की भूमिका ‘किंगमेकर’ से बढ़कर ‘किंग’ की हो सकती है। यही कारण है कि अमेरिका और पाकिस्तान दोनों ही उन पर दांव खेल रहे हैं।

भारत के लिए क्या हैं चुनौतियां?

भारत के लिए बांग्लादेश राजनीतिक संकट एक बड़ा सुरक्षा जोखिम (Security Risk) लेकर आया है। शेख हसीना भारत की एक भरोसेमंद सहयोगी थीं, जिन्होंने उत्तर-पूर्व के विद्रोहियों को कुचलने में भारत की मदद की थी। अब अगर वहां एक ऐसी सरकार आती है जो पाकिस्तान या चीन के प्रभाव में है, तो भारत के लिए चिकन नेक कॉरिडोर (Chicken’s Neck) की सुरक्षा एक बड़ी चिंता बन जाएगी।

भारत फिलहाल ‘Wait and Watch’ की नीति अपना रहा है। नई दिल्ली ने साफ किया है कि वह बांग्लादेश के लोगों की आकांक्षाओं का सम्मान करता है, लेकिन कट्टरपंथी ताकतों का उदय भारत के लिए कतई ठीक नहीं है।

आर्थिक और सीमा सुरक्षा

भारत और बांग्लादेश के बीच करोड़ों डॉलर का व्यापार होता है। अस्थिरता के कारण कई प्रोजेक्ट्स रुक गए हैं। इसके अलावा, सीमा पर घुसपैठ और अल्पसंख्यकों (खासकर हिंदुओं) पर हो रहे हमले भारत के लिए एक भावनात्मक और रणनीतिक मुद्दा बन गए हैं।

निष्कर्ष

अंत में, बांग्लादेश राजनीतिक संकट अभी थमा नहीं है। यह तो बस एक नई राजनीतिक लड़ाई की शुरुआत है। जहां एक तरफ छात्र एक ‘नया बांग्लादेश’ बनाने का सपना देख रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ वैश्विक शक्तियां अपनी बिसात बिछा रही हैं। Tarique Rahman का भविष्य और अमेरिका-पाकिस्तान की जुगलबंदी आने वाले समय में दक्षिण एशिया का नक्शा बदल सकती है।

दुनिया भर की नजरें अब ढाका पर टिकी हैं कि क्या यह देश लोकतंत्र की राह पर लौटेगा या फिर वैश्विक शक्तियों के बीच ‘प्रॉक्सि वॉर’ (Proxy War) का मैदान बनकर रह जाएगा। Official Source से आने वाली हर अपडेट अब बहुत महत्वपूर्ण होने वाली है।

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