ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री: सोनीपत में बढ़ती चुनौतियां और समाधान की तलाश
ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री आज भारत की अर्थव्यवस्था का एक मजबूत स्तंभ बन चुकी है, लेकिन हरियाणा के सोनीपत जैसे प्रमुख औद्योगिक हब में इस समय स्थिति थोड़ी चिंताजनक बनी हुई है। सोनीपत, जिसे कुंडली, राई, मुरथल और गन्नौर जैसे औद्योगिक क्षेत्रों के लिए जाना जाता है, यहाँ की ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री (Automobile Industry) इस समय दोहरे संकट से जूझ रही है। पहला संकट है कुशल श्रमिकों (Skilled Labor) की भारी कमी और दूसरा है आधुनिक मशीनरी व टूल्स की बढ़ती लागत। हाल ही में सोनीपत के उद्यमियों ने सरकार के सामने अपनी मांगें रखी हैं, जिसमें उन्होंने टूल्स और मशीनरी पर विशेष सब्सिडी देने की अपील की है ताकि वे ग्लोबल मार्केट में प्रतिस्पर्धा कर सकें।
सोनीपत की ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री में कुशल श्रमिकों का अभाव
सोनीपत की ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री पिछले कई दशकों से मारुति सुजुकी, होंडा और अन्य बड़े ऑटो दिग्गजों के लिए स्पेयर पार्ट्स और कंपोनेंट्स की सप्लाई कर रही है। हालांकि, पिछले कुछ वर्षों में यहाँ स्किल्ड लेबर यानी कुशल श्रमिकों की भारी कमी महसूस की जा रही है। उद्यमियों का कहना है कि आज के दौर में जब गाड़ियां एडवांस हो रही हैं, तो उनके पार्ट्स बनाने के लिए एडवांस स्किल सेट वाले लोगों की जरूरत है।
आईटीआई (ITI) पास युवाओं में वह प्रैक्टिकल नॉलेज नहीं मिल पा रही है जो आधुनिक सीएनसी (CNC) और वीएमसी (VMC) मशीनों को चलाने के लिए आवश्यक है। इसके कारण प्रोडक्शन की क्वालिटी प्रभावित हो रही है। कई बार कंपनियों को कच्चा माल खराब होने के कारण भारी नुकसान उठाना पड़ता है। सोनीपत के उद्यमी संघों का मानना है कि यदि सरकार स्थानीय स्तर पर ट्रेनिंग सेंटर नहीं खोलती, तो आने वाले समय में यहाँ की ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री के लिए सर्वाइव करना मुश्किल हो जाएगा।
ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री के आधुनिकीकरण के लिए सब्सिडी की मांग
जब हम ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री के भविष्य की बात करते हैं, तो बिना मॉडर्नाइजेशन के इसकी कल्पना करना असंभव है। सोनीपत के सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs) का कहना है कि आज के समय में नई तकनीक वाली मशीनें और टूल्स काफी महंगे हो गए हैं। एक छोटी सीएनसी मशीन की कीमत भी लाखों में होती है, जो छोटे उद्यमियों के बजट से बाहर है।
उद्यमियों ने मांग की है कि केंद्र और राज्य सरकार को मिलकर ‘टेक्नोलॉजी अपग्रेडेशन फंड स्कीम’ (TUFS) की तर्ज पर ऑटोमोबाइल सेक्टर के लिए भी एक विशेष योजना लानी चाहिए। इसमें टूल्स, डाइज और अत्याधुनिक मशीनों की खरीद पर कम से कम 25% से 40% तक की सब्सिडी मिलनी चाहिए। इससे न केवल प्रोडक्शन की रफ्तार बढ़ेगी, बल्कि भारत के ‘मेक इन इंडिया’ अभियान को भी मजबूती मिलेगी।
सोनीपत के औद्योगिक क्षेत्रों की वर्तमान स्थिति
सोनीपत में मुख्य रूप से चार बड़े इंडस्ट्रियल जोन हैं जहाँ ऑटोमोबाइल पार्ट्स का काम बड़े स्तर पर होता है:
- कुंडली इंडस्ट्रियल एरिया: यहाँ दिल्ली के करीब होने का फायदा मिलता है, लेकिन ट्रैफिक और इंफ्रास्ट्रक्चर की समस्याएं अभी भी बरकरार हैं।
- राई औद्योगिक क्षेत्र: यह ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरिंग का बड़ा केंद्र है, यहाँ कई बड़ी यूनिट्स लगी हुई हैं।
- मुरथल: यहाँ रबर और प्लास्टिक कंपोनेंट्स का ज्यादा काम होता है।
- गन्नौर: यहाँ नए प्लांट लग रहे हैं, लेकिन कुशल कामगारों की कमी यहाँ सबसे बड़ी बाधा है।
मशीनरी की बढ़ती लागत और छोटे उद्यमियों का दर्द
ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री में इस्तेमाल होने वाले टूल्स की लाइफ साइकिल बहुत कम होती जा रही है क्योंकि गाड़ियों के मॉडल तेजी से बदल रहे हैं। जब भी कोई नया मॉडल लॉन्च होता है, वेंडर्स को अपनी डाइज और मोल्ड्स बदलने पड़ते हैं। इसमें करोड़ों का निवेश लगता है। बिना सरकारी सहायता या बैंक लोन में छूट के, छोटे वेंडर्स के लिए यह निवेश करना संभव नहीं रह गया है। उद्यमियों का कहना है कि बिजली की बढ़ती दरों और कच्चे माल (स्टील, एल्युमीनियम) की कीमतों में उतार-चढ़ाव ने पहले ही कमर तोड़ रखी है, ऊपर से मशीनरी अपग्रेडेशन का दबाव उन्हें उद्योग बंद करने पर मजबूर कर रहा है।
ऑटोमोबाइल सेक्टर के लिए प्रस्तावित डेटा टेबल
नीचे दी गई टेबल सोनीपत की ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री की मुख्य चुनौतियों और उद्यमियों की प्रमुख मांगों को दर्शाती है:
| प्रमुख श्रेणी (Category) | वर्तमान चुनौतियां (Current Challenges) | उद्यमियों की मांग (Demands) |
|---|---|---|
| कुशल श्रमिक (Skilled Labor) | एडवांस मशीनों के ऑपरेटरों की कमी | इंडस्ट्रियल एरिया में स्किल डेवलपमेंट सेंटर |
| मशीनरी (Machinery) | नई तकनीक की मशीनें बहुत महंगी हैं | 25% – 40% तक कैपिटल सब्सिडी |
| कच्चा माल (Raw Material) | स्टील और रबर की कीमतों में अस्थिरता | कच्चे माल की कीमतों का रेगुलेशन |
| इंफ्रास्ट्रक्चर (Infrastructure) | जलभराव और खराब सड़कों की समस्या | स्मार्ट इंडस्ट्रियल टाउनशिप का विकास |
| टैक्स (Taxation) | जटिल जीएसटी (GST) और कागजी कार्रवाई | छोटे उद्योगों के लिए सरल टैक्स प्रक्रिया |
क्या कहते हैं इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स?
सोनीपत के एक प्रमुख ऑटो पार्ट मैन्युफैक्चरर का कहना है, “हम ग्लोबल कॉम्पिटिशन में चीन और वियतनाम जैसे देशों से तभी मुकाबला कर सकते हैं जब हमारी मैन्युफैक्चरिंग कॉस्ट कम हो। अगर हमें मशीनों पर सब्सिडी और सस्ते कर्ज मिलते हैं, तो हम कम कीमत पर बेहतर क्वालिटी दे पाएंगे। साथ ही, सरकार को आईटीआई के सिलेबस को इंडस्ट्री की जरूरतों के हिसाब से अपडेट करना चाहिए ताकि हमें ‘रेडी-टू-वर्क’ वर्कफोर्स मिल सके।”
एक्सपर्ट्स का यह भी मानना है कि आने वाले समय में इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (EV) का दबदबा होगा। ऐसे में पारंपरिक ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री को ईवी कंपोनेंट्स बनाने की ओर शिफ्ट होना होगा। इसके लिए नई मशीनों की जरूरत पड़ेगी, जिसमें सरकार का सहयोग अनिवार्य है। अगर समय रहते ध्यान नहीं दिया गया, तो सोनीपत का यह औद्योगिक हब पिछड़ सकता है।
रोजगार के अवसर और स्थानीय युवाओं की भागीदारी
ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री में अगर कुशल श्रमिक तैयार किए जाते हैं, तो इससे स्थानीय युवाओं को बड़े पैमाने पर रोजगार मिलेगा। फिलहाल, बहुत से युवाओं को काम की तलाश में गुड़गांव या फरीदाबाद जाना पड़ता है। यदि सोनीपत में ही अच्छी ट्रेनिंग और उचित मानदेय मिले, तो यह शहर ऑटोमोबाइल सेक्टर का सिरमौर बन सकता है। उद्यमियों ने मुख्यमंत्री और उद्योग मंत्री से अपील की है कि वे जल्द ही सोनीपत का दौरा करें और जमीनी हकीकत को जानकर राहत पैकेज की घोषणा करें।
निष्कर्ष: भविष्य की राह
सोनीपत की ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री (Automobile Industry) में अपार संभावनाएं हैं, बशर्ते इसे सही दिशा और सरकारी समर्थन मिले। कुशल श्रमिकों की कमी को दूर करने के लिए पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल पर ट्रेनिंग सेंटर शुरू होने चाहिए। मशीनरी पर सब्सिडी न केवल उत्पादन बढ़ाएगी बल्कि निर्यात (Export) में भी वृद्धि करेगी। उम्मीद है कि सरकार उद्यमियों की इन जायज मांगों पर गौर करेगी और सोनीपत के औद्योगिक विकास को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए ठोस कदम उठाएगी।
अंत में, यह स्पष्ट है कि बिना स्किल और टेक्नोलॉजी के मेल के, ऑटोमोबाइल सेक्टर की यह रफ्तार कायम रखना मुश्किल होगा। अब गेंद सरकार के पाले में है कि वह किस तरह इन समस्याओं का समाधान करती है।
