Exclusive: जानिए महायुद्ध की आहट के बीच कैसे ‘हाई-टेक’ जंग की तैयारी कर रहा ईरान – AajTak

तकनीकी युद्ध: ईरान की हाई-टेक तैयारी

**तकनीकी युद्ध** की आहट के बीच, दुनिया की नज़रें मध्य पूर्व पर टिकी हैं, जहाँ ईरान अपनी रक्षा तैयारियों को अभूतपूर्व ऊंचाइयों पर ले जा रहा है। हालिया घटनाक्रमों और भू-राजनीतिक तनाव के बीच, यह स्पष्ट होता जा रहा है कि ईरान पारंपरिक युद्ध के साथ-साथ एक “हाई-टेक” युद्ध की तैयारी में जुटा है। आजतक के एक्सक्लूसिव खुलासे में हम जानेंगे कि कैसे ईरान अपनी तकनीकी क्षमताओं को बढ़ाकर किसी भी संभावित संघर्ष का सामना करने के लिए खुद को तैयार कर रहा है।

मध्य पूर्व का नक्शा इन दिनों बेहद नाजुक दौर से गुजर रहा है। क्षेत्रीय तनाव, प्रमुख शक्तियों के बीच बढ़ती प्रतिस्पर्धा और परमाणु कार्यक्रमों को लेकर चिंताएं, एक बड़े संघर्ष की आशंकाओं को बढ़ा रही हैं। ऐसे माहौल में, ईरान जैसी क्षेत्रीय शक्ति अपनी रक्षा रणनीति में लगातार बदलाव कर रही है। यह बदलाव केवल हथियारों के जखीरे तक सीमित नहीं है, बल्कि यह अत्याधुनिक तकनीकों, विशेष रूप से सूचना प्रौद्योगिकी, साइबर युद्ध, ड्रोन तकनीक और इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर (EW) पर केंद्रित है।

ईरान की तकनीकी प्रगति कई मोर्चों पर देखी जा सकती है। सबसे पहले, ड्रोन तकनीक के क्षेत्र में ईरान ने काफी महारत हासिल की है। यह न केवल अपनी रक्षा के लिए, बल्कि संभावित आक्रामक अभियानों के लिए भी ड्रोन का इस्तेमाल करने की क्षमता विकसित कर रहा है। इन ड्रोनों को टोही मिशन, निगरानी, और यहां तक कि छोटे पैमाने पर हमला करने के लिए भी डिज़ाइन किया जा रहा है। इनकी रेंज, पेलोड क्षमता और स्वायत्तता (autonomy) में लगातार सुधार किया जा रहा है। ईरान के पास विभिन्न प्रकार के ड्रोन हैं, जिनमें लंबी दूरी तक उड़ान भरने वाले और सटीक निशाना लगाने में सक्षम ड्रोन शामिल हैं। यह क्षमता उन्हें अपने विरोधियों की गतिविधियों पर नज़र रखने और आवश्यक होने पर त्वरित प्रतिक्रिया देने में मदद करती है।

दूसरे, साइबर युद्ध के क्षेत्र में ईरान एक महत्वपूर्ण खिलाड़ी के रूप में उभर रहा है। इस क्षेत्र में, ईरान अपनी रक्षात्मक और आक्रामक क्षमताओं को मजबूत कर रहा है। इसका मतलब है कि वे महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे, सरकारी नेटवर्कों और सैन्य संचार प्रणालियों को साइबर हमलों से बचाने के लिए मजबूत सुरक्षा उपाय विकसित कर रहे हैं। साथ ही, वे अन्य देशों के खिलाफ साइबर हमलों को अंजाम देने की क्षमता भी विकसित कर रहे हैं। यह क्षमता उन्हें बिना सीधा सैन्य टकराव किए भी अपने विरोधियों को कमजोर करने का एक शक्तिशाली जरिया प्रदान करती है। गुप्त सूचनाओं तक पहुंच बनाना, दुष्प्रचार फैलाना, या महत्वपूर्ण प्रणालियों को बाधित करना, ये सभी साइबर युद्ध के दायरे में आते हैं।

तीसरे, इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर (EW) के क्षेत्र में ईरान का निवेश उल्लेखनीय है। EW का मतलब है कि दुश्मन के संचार, रडार और अन्य इलेक्ट्रॉनिक प्रणालियों को जाम करना, धोखा देना या नष्ट करना। ईरान अपने EW सिस्टम को उन्नत कर रहा है ताकि वे दुश्मन के संचार को बाधित कर सकें, उनके रडार सिस्टम को अंधा कर सकें और उनके ड्रोन को निष्क्रिय कर सकें। यह क्षमता उन्हें युद्ध के मैदान में एक महत्वपूर्ण रणनीतिक लाभ प्रदान करती है, क्योंकि यह दुश्मन की दृश्यता और संचार को गंभीर रूप से बाधित कर सकती है।

चौथे, ईरान सूचना युद्ध और मनोवैज्ञानिक अभियानों पर भी ध्यान केंद्रित कर रहा है। वे सोशल मीडिया और अन्य ऑनलाइन प्लेटफार्मों का उपयोग अपने एजेंडे को बढ़ावा देने, दुष्प्रचार फैलाने और अपने विरोधियों की मनोबल को तोड़ने के लिए कर रहे हैं। यह एक “हाई-टेक” युद्ध का एक महत्वपूर्ण पहलू है, जहाँ सच्चाई और झूठ के बीच की रेखा अक्सर धुंधली हो जाती है।

ईरान की यह “हाई-टेक” युद्ध की तैयारी केवल रक्षात्मक उद्देश्यों तक सीमित नहीं है। यह इस क्षेत्र में शक्ति संतुलन को बदलने की उनकी महत्वाकांक्षा का भी एक हिस्सा है। वे यह दिखाना चाहते हैं कि वे किसी भी बाहरी हस्तक्षेप का दृढ़ता से जवाब दे सकते हैं, और वे अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं।

इस “हाई-टेक” तैयारी के कुछ मुख्य पहलू इस प्रकार हैं:

  • ड्रोन प्रौद्योगिकी: टोही, निगरानी और हमला करने की क्षमता वाले उन्नत ड्रोन का विकास और तैनाती।
  • साइबर सुरक्षा और साइबर युद्ध: अपने महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे की सुरक्षा और दुश्मन के नेटवर्कों पर हमला करने की क्षमता का विकास।
  • इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर (EW): दुश्मन के संचार और रडार सिस्टम को जाम करने और बाधित करने की क्षमता में वृद्धि।
  • सूचना युद्ध और दुष्प्रचार: सार्वजनिक राय को प्रभावित करने और मनोवैज्ञानिक लाभ प्राप्त करने के लिए ऑनलाइन प्लेटफार्मों का उपयोग।
  • मिसाइल प्रौद्योगिकी: उन्नत मिसाइलों का विकास, जिनमें सटीक निशाना लगाने की क्षमता हो, जो “हाई-टेक” युद्ध का एक अभिन्न अंग हैं।
  • आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI): AI का उपयोग टोही, लक्ष्य निर्धारण और स्वायत्त प्रणालियों के विकास में तेजी से किया जा रहा है।

ईरान की यह “हाई-टेक” युद्ध की तैयारी दुनिया के लिए एक चेतावनी संकेत है। यह दर्शाता है कि भविष्य के युद्ध केवल पारंपरिक हथियारों से नहीं, बल्कि तकनीक और सूचना के उपयोग से भी लड़े जाएंगे। यह क्षेत्र में एक नए प्रकार के संघर्ष को जन्म दे सकता है, जहाँ सफलता काफी हद तक तकनीकी श्रेष्ठता पर निर्भर करेगी। ईरान का यह कदम इस बात का संकेत है कि वे इस नई वास्तविकता के लिए पूरी तरह से तैयार हैं। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि दुनिया इस “हाई-टेक” चुनौती का सामना कैसे करती है।

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