जल्दी शादी

जल्दी शादी से दूरी क्यों बना रहे हैं युवा? करियर, फ्रीडम या जिम्मेदारी का डर?

Highlights: इस आर्टिकल में क्या है?

  • जल्दी शादी से बचने के प्रमुख सामाजिक और व्यक्तिगत कारण।
  • करियर और फाइनेंशियल इंडिपेंडेंस की बढ़ती अहमियत।
  • पर्सनल फ्रीडम और ‘Me Time’ का बदलता कॉन्सेप्ट।
  • शादी को लेकर बढ़ता हुआ डर और कमिटमेंट का प्रेशर।
  • बदलती सोच: पहले करियर, फिर लाइफ पार्टनर।

जल्दी शादी आज के समय में युवाओं के लिए एक बड़ा सवाल बन गया है। एक दौर था जब भारत में 20 से 22 साल की उम्र होते ही माता-पिता बच्चों की शादी की चिंता करने लगते थे, लेकिन आज की जेनरेशन यानी Millennials और Gen Z इस मामले में बिल्कुल अलग सोच रखते हैं। आज का युवा शादी के नाम पर भागता नहीं है, बल्कि वह इसे तब अपनाना चाहता है जब वह मानसिक, शारीरिक और सबसे महत्वपूर्ण रूप से आर्थिक रूप से तैयार हो।

बदलते दौर में जल्दी शादी का घटता क्रेज

भारतीय समाज में पिछले दो दशकों में जबरदस्त बदलाव आया है। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में युवाओं की प्राथमिकताएं बदल गई हैं। जल्दी शादी करने के बजाय वे अपने करियर की सीढ़ियां चढ़ने में अधिक रुचि दिखा रहे हैं। इसके पीछे कई ठोस कारण हैं, जिनमें सबसे प्रमुख है शिक्षा का विस्तार। अब लड़कियां भी उच्च शिक्षा के लिए बाहर जा रही हैं और वे शादी से पहले एक सफल करियर बनाना चाहती हैं। TimesNews360 की एक रिपोर्ट के अनुसार, अर्बन एरियाज में शादी की औसत उम्र में 4-5 साल का इजाफा हुआ है।

1. करियर और प्रोफेशनल गोल्स (Career First)

आज के समय में कॉम्पीटिशन इतना बढ़ गया है कि एक अच्छी जॉब या बिजनेस सेट करने में ही 25-26 साल की उम्र निकल जाती है। युवाओं का मानना है कि यदि वे जल्दी शादी कर लेते हैं, तो करियर पर ध्यान केंद्रित करना मुश्किल हो सकता है। ऑफिस की जिम्मेदारियां, प्रमोशन की रेस और वर्क-लाइफ बैलेंस बनाना पहले से ही चुनौतीपूर्ण है, ऐसे में शादी की नई जिम्मेदारी लेना उन्हें थोड़ा रिस्की लगता है।

2. फाइनेंशियल इंडिपेंडेंस की चाहत

आर्थिक आजादी आज के युवाओं के लिए सबसे ऊपर है। वे नहीं चाहते कि शादी के बाद वे अपने छोटे-छोटे खर्चों के लिए पार्टनर या माता-पिता पर निर्भर रहें। खुद का घर, गाड़ी और एक अच्छी सेविंग होने के बाद ही वे शादी के बंधन में बंधना पसंद करते हैं। महंगाई के इस दौर में एक परिवार को चलाना आसान नहीं है, इसलिए फाइनेंस को स्टेबल करना उनकी प्रायोरिटी है।

पर्सनल फ्रीडम और आजादी का सवाल

कई युवाओं का मानना है कि जल्दी शादी करने से उनकी पर्सनल फ्रीडम यानी व्यक्तिगत आजादी छिन सकती है। वे दुनिया घूमना चाहते हैं, अपने शौक पूरे करना चाहते हैं और खुद के साथ समय बिताना चाहते हैं। आज की पीढ़ी ‘Self-Love’ और ‘Self-Exploration’ को बहुत महत्व देती है।

शादी का मतलब अक्सर लोग जिम्मेदारियों का बोझ समझते हैं। घर के काम, रिश्तेदारों को संभालना और पार्टनर की जरूरतों को पूरा करना—ये सब बातें 20-25 साल के युवाओं को डराने लगी हैं। उन्हें लगता है कि अभी तो उन्होंने अपनी जिंदगी जीना शुरू ही किया है, तो फिर इतनी जल्दी बंधनों में क्यों बंधना?

जिम्मेदारी का डर या कमिटमेंट फोबिया?

क्या वाकई आज का युवा जिम्मेदारी से डरता है? या फिर यह सिर्फ एक समझदारी भरा फैसला है? एक्सपर्ट्स के अनुसार, यह डर नहीं बल्कि ‘रियलिस्टिक अप्रोच’ है। आजकल के युवा अपने आसपास बढ़ते हुए डिवोर्स रेट्स और टूटते रिश्तों को देख रहे हैं। वे नहीं चाहते कि वे जल्दबाजी में कोई ऐसा फैसला लें जिसे बाद में पछताना पड़े। इसलिए, वे जल्दी शादी के बजाय ‘Right Partner’ का इंतजार करना बेहतर समझते हैं।

शादी से जुड़े बदलते नजरिए: एक तुलनात्मक नजर

फैक्टरपुराना नजरिया (80s-90s)आज का नजरिया (Modern Era)
शादी की सही उम्र20 से 24 साल28 से 35 साल
मुख्य प्राथमिकतापरिवार बढ़ाना / सेटल होनाकरियर और फाइनेंशियल फ्रीडम
फैसला किसका?माता-पिता और समाज कापूरी तरह व्यक्तिगत फैसला
मैरिज गोलसमझौता और निभानाइमोशनल कम्पैटिबिलिटी और साथ बढ़ना

इमोशनल मैच्योरिटी का महत्व

जल्दी शादी न करने का एक बड़ा कारण इमोशनल मैच्योरिटी की कमी भी है। 21-22 साल की उम्र में इंसान खुद को समझ रहा होता है। उस उम्र में लिए गए फैसले अक्सर जज्बाती होते हैं। आज के युवाओं का मानना है कि 25-26 साल की उम्र के बाद ही व्यक्ति में इतनी समझ आती है कि वह दूसरे इंसान के साथ अपनी पूरी जिंदगी शेयर कर सके।

सोशल मीडिया के दौर में रिश्तों की परिभाषा बदल गई है। अब लोग केवल शादी के लिए शादी नहीं करना चाहते, बल्कि वे एक ऐसा ‘Companion’ चाहते हैं जो उनके सपनों को समझे। जब तक उन्हें ऐसा कोई नहीं मिलता, वे सिंगल रहना या डेटिंग करना पसंद करते हैं।

पेरेंट्स और सोसाइटी का बदलता प्रेशर

हालांकि समाज अब भी जल्दी शादी के लिए दबाव बनाता है, लेकिन अब पेरेंट्स की सोच में भी धीरे-धीरे बदलाव आ रहा है। वे देख रहे हैं कि करियर कितना जरूरी है। लेकिन, फिर भी ‘लोग क्या कहेंगे’ वाला फैक्टर आज भी मौजूद है। इस प्रेशर की वजह से कई बार युवा तनाव (Stress) का शिकार हो जाते हैं। उन्हें लगता है कि अगर उन्होंने 30 की उम्र तक शादी नहीं की, तो शायद वे कभी नहीं कर पाएंगे।

विशेषज्ञों का कहना है कि शादी एक निजी मामला है और इसे किसी उम्र की सीमा में नहीं बांधा जाना चाहिए। भारत में शादी से जुड़े कानूनों और रीति-रिवाजों की विस्तृत जानकारी के लिए आप Wikipedia पर जा सकते हैं।

निष्कर्ष: क्या जल्दी शादी गलत है?

अंत में सवाल यह उठता है कि क्या जल्दी शादी करना वाकई गलत है? इसका जवाब हर किसी के लिए अलग हो सकता है। अगर कोई व्यक्ति आर्थिक रूप से सक्षम है और उसे अपना सही जीवनसाथी मिल गया है, तो जल्दी शादी करने में कोई बुराई नहीं है। लेकिन, केवल समाज के डर से या घर वालों के दबाव में आकर शादी करना भविष्य के लिए नुकसानदेह हो सकता है।

आज की पीढ़ी यह अच्छी तरह जानती है कि शादी केवल एक रस्म नहीं बल्कि एक लाइफटाइम कमिटमेंट है। इसलिए, जल्दी शादी से बचने का कारण डर नहीं, बल्कि अपनी लाइफ को सही दिशा में ले जाने की एक ईमानदार कोशिश है। वे चाहते हैं कि जब वे ‘I Do’ कहें, तो उनके मन में कोई पछतावा न हो और वे पूरी तरह से उस रिश्ते के लिए तैयार हों।

आजकल के युवाओं का मंत्र है—’सफल बनो, खुश रहो और फिर शादी करो’। यह ट्रेंड आने वाले समय में और भी मजबूत होने वाला है। शादी की उम्र बढ़ना इस बात का संकेत है कि हमारा समाज अब अधिक जागरूक और प्रैक्टिकल हो रहा है।

आपको क्या लगता है? क्या जल्दी शादी करना बेहतर है या करियर बनाने के बाद शादी करना सही फैसला है? अपनी राय हमें जरूर बताएं।

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