- Highlights: इस आर्टिकल में क्या है?
- ICRA की रिपोर्ट के अनुसार FY27 में ऑटो सेक्टर की अनुमानित ग्रोथ।
- पैसेंजर व्हीकल्स और टू-व्हीलर सेगमेंट में बदलते ट्रेंड्स का विश्लेषण।
- इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (EV) की बढ़ती हिस्सेदारी और उसका असर।
- कमर्शियल व्हीकल सेगमेंट में आने वाली चुनौतियां और अवसर।
- प्रीमियम कारों और SUV के प्रति ग्राहकों का बदलता नजरिया।
ऑटो सेक्टर (Auto Sector) आज भारतीय अर्थव्यवस्था के सबसे मजबूत स्तंभों में से एक है, लेकिन आने वाले कुछ साल इस इंडस्ट्री के लिए ‘मिक्स बैग’ साबित हो सकते हैं। रेटिंग एजेंसी ICRA के हालिया आकलन के मुताबिक, फाइनेंशियल ईयर 2027 (FY27) में भारतीय ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री की ग्रोथ काफी ‘म्यूटेड’ यानी सामान्य रहने की उम्मीद है। पिछले कुछ सालों में हमने जो एग्रेसिव ग्रोथ देखी थी, उसमें अब थोड़ा ठहराव आता दिख रहा है। इसके पीछे कई ग्लोबल और डोमेस्टिक कारण हैं, जिन्हें समझना हर निवेशक और ऑटो एंथुसिएस्ट के लिए जरूरी है।
ऑटो सेक्टर की धीमी रफ्तार का क्या है कारण?
जब हम ऑटो सेक्टर की बात करते हैं, तो इसमें पैसेंजर व्हीकल (PV), टू-व्हीलर (2W), और कमर्शियल व्हीकल (CV) जैसे कई बड़े सेगमेंट शामिल होते हैं। ICRA की रिपोर्ट इशारा करती है कि FY25 और FY26 की तुलना में FY27 में वॉल्यूम ग्रोथ सिंगल डिजिट में सिमट सकती है। इसका सबसे बड़ा कारण ‘हाई बेस इफेक्ट’ (High Base Effect) है। पिछले दो-तीन सालों में पोस्ट-पैंडेमिक डिमांड की वजह से गाड़ियों की बिक्री में जो उछाल आया था, वह अब धीरे-धीरे स्टेबल हो रहा है।
टाइम्स न्यूज़ 360 (timesnews360.com) के एनालिसिस के मुताबिक, मिडिल क्लास की परचेजिंग पावर में आ रहे बदलाव और फाइनेंसिंग रेट्स का ऊंचा रहना भी एक बड़ी वजह है। हालांकि, प्रीमियम सेगमेंट में अभी भी अच्छी डिमांड बनी हुई है, लेकिन मास-मार्केट सेगमेंट (जैसे सस्ती हैचबैक कारें) अभी भी संघर्ष कर रहा है।
पैसेंजर व्हीकल सेगमेंट: SUVs का जलवा बरकरार
ऑटो सेक्टर में सबसे ज्यादा हलचल पैसेंजर व्हीकल सेगमेंट में देखने को मिल रही है। भारतीय ग्राहकों का टेस्ट अब बदल चुका है। अब लोग छोटी कारों के बजाय कॉम्पैक्ट SUV और फुल-साइज SUV को ज्यादा तवज्जो दे रहे हैं। ICRA का कहना है कि FY27 तक मार्केट में SUV की हिस्सेदारी और बढ़ेगी। प्रीमियम फीचर्स जैसे सनरूफ, ADAS (Advanced Driver Assistance Systems), और वेंटिलेटेड सीट्स अब लग्जरी नहीं बल्कि जरूरत बन गए हैं।
| सेगमेंट | FY25 (अनुमानित ग्रोथ) | FY27 (अनुमानित ग्रोथ) | मुख्य ट्रेंड |
|---|---|---|---|
| पैसेंजर व्हीकल (PV) | 5-7% | 3-5% | SUV की डिमांड में तेजी |
| टू-व्हीलर (2W) | 9-11% | 6-8% | EV स्कूटर्स का बढ़ता शेयर |
| कमर्शियल व्हीकल (CV) | 0-3% | 2-4% | इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स का असर |
टू-व्हीलर मार्केट: क्या ग्रामीण मांग लौटेगी?
टू-व्हीलर इंडस्ट्री के लिए ऑटो सेक्टर में पिछले कुछ साल काफी चुनौतीपूर्ण रहे थे। हालांकि, अब रिकवरी के संकेत मिल रहे हैं। ICRA का मानना है कि FY27 तक रूरल इकोनॉमी में सुधार होने से एंट्री-लेवल बाइक्स की बिक्री में सुधार होगा। साथ ही, इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर्स का पेनेट्रेशन काफी तेजी से बढ़ रहा है। सरकार की PLI स्कीम और फेम (FAME) सब्सिडी के नए वर्जन इस सेगमेंट को बूस्ट दे सकते हैं।
भारतीय ऑटोमोबाइल उद्योग के बारे में और अधिक जानने के लिए आप Wikipedia पर विस्तृत जानकारी देख सकते हैं।
इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (EV): भविष्य की उम्मीद
ऑटो सेक्टर में सबसे बड़ा ट्रांसफॉर्मेशन इलेक्ट्रिक व्हीकल्स के रूप में आ रहा है। भले ही ओवरऑल ग्रोथ धीमी रहे, लेकिन EV सेगमेंट में डबल-डिजिट ग्रोथ जारी रहने की संभावना है। टाटा मोटर्स, महिंद्रा, और अब हुंडई जैसे बड़े प्लेयर्स अपने नए EV मॉडल्स लाइन-अप कर रहे हैं। चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार FY27 तक एक निर्णायक मोड़ पर होगा, जिससे रेंज एंग्जायटी (Range Anxiety) कम होगी और लोग ज्यादा इलेक्ट्रिक गाड़ियां खरीदेंगे।
प्रीमियम बनाम मास मार्केट का संघर्ष
ICRA ने अपनी रिपोर्ट में ‘K-Shaped Recovery’ की तरफ भी इशारा किया है। इसका मतलब है कि अमीर तबका महंगी और प्रीमियम गाड़ियां खरीद रहा है, जिससे ऑटो सेक्टर के रेवेन्यू में तो बढ़ोतरी हो रही है, लेकिन वॉल्यूम के लिहाज से सस्ती कारों का मार्केट छोटा हो रहा है। मारुति सुजुकी जैसी कंपनियों को अब अपनी स्ट्रैटेजी बदलनी पड़ रही है और वे भी अब प्रीमियम SUV सेगमेंट (जैसे ग्रैंड विटारा और इनविक्टो) पर ज्यादा फोकस कर रही हैं।
कमर्शियल व्हीकल सेगमेंट की चुनौतियां
लॉजिस्टिक्स और ट्रांसपोर्टेशन ऑटो सेक्टर की रीढ़ हैं। कमर्शियल व्हीकल (CV) सेगमेंट अक्सर देश की GDP ग्रोथ के साथ कदम मिलाकर चलता है। FY27 में इंफ्रास्ट्रक्चर पर सरकार के खर्च और माइनिंग एक्टिविटीज में तेजी आने की उम्मीद है, जिससे हैवी ट्रक्स की मांग बनी रहेगी। हालांकि, रिप्लेसमेंट डिमांड (पुरानी गाड़ियों को नई से बदलना) में थोड़ी कमी आ सकती है क्योंकि BS-VI फेज 2 के लागू होने के बाद गाड़ियों की कीमतें काफी बढ़ गई हैं।
फाइनेंसिंग और ब्याज दरों का असर
किसी भी मिडिल क्लास परिवार के लिए कार खरीदना एक बड़ा फाइनेंशियल डिसीजन होता है। ऑटो सेक्टर की ग्रोथ काफी हद तक बैंकों के इंटरेस्ट रेट्स पर निर्भर करती है। अगर RBI आने वाले समय में रेपो रेट में कटौती करता है, तो ऑटो लोन सस्ते होंगे और इससे बिक्री को सपोर्ट मिलेगा। लेकिन अगर महंगाई की वजह से दरें ऊंची रहती हैं, तो FY27 में ग्रोथ का ग्राफ और भी नीचे जा सकता है।
एक्सपर्ट की राय: क्या कहते हैं एनालिस्ट?
मार्केट एनालिस्ट्स का मानना है कि ऑटो सेक्टर अब एक ‘कंसोलिडेशन फेज’ में प्रवेश कर रहा है। कंपनियों को अब केवल सेल्स पर नहीं, बल्कि मार्जिन और इनोवेशन पर ध्यान देना होगा। ICRA की सीनियर वाइस प्रेसिडेंट शमशेर दीवान के मुताबिक, “इंडस्ट्री अब एक ऐसे मोड़ पर है जहां डिमांड स्थिर हो रही है। इन्वेंट्री लेवल को मैनेज करना और नए एमिशन नॉर्म्स के साथ तालमेल बिठाना कंपनियों के लिए बड़ी चुनौती होगी।”
निष्कर्ष: FY27 में निवेश और खरीद की स्ट्रैटेजी
अंत में, ऑटो सेक्टर में FY27 की तस्वीर धुंधली नहीं बल्कि संतुलित है। जो लोग नई गाड़ी खरीदने का सोच रहे हैं, उनके लिए यह साल हाइब्रिड और EV के बेहतरीन विकल्पों से भरा होगा। वहीं निवेशकों के लिए उन कंपनियों पर दांव लगाना समझदारी होगी जो तकनीक और प्रीमियम सेगमेंट में लीडर बनकर उभर रही हैं।
कुल मिलाकर, ऑटो सेक्टर में आने वाले समय में ‘क्वालिटी ओवर क्वांटिटी’ का दौर देखने को मिलेगा। भले ही सड़कों पर नई गाड़ियों की संख्या उतनी तेजी से न बढ़े, लेकिन जो गाड़ियां आएंगी, वे स्मार्ट, सुरक्षित और ज्यादा एफिशिएंट होंगी। टाइम्स न्यूज़ 360 आपको ऑटो जगत की हर छोटी-बड़ी अपडेट देता रहेगा, ताकि आप हमेशा अपडेटेड रहें।
इस बदलते दौर में ऑटो सेक्टर की हर करवट पर नजर रखना जरूरी है, क्योंकि यह केवल गाड़ियों का मार्केट नहीं, बल्कि देश की तरक्की का आईना है।
