बिज़नेस कॉन्क्लेव

बिज़नेस कॉन्क्लेव: ईएमसी ने डॉक्टर्स और कॉर्पोरेट दिग्गजों के साथ हेल्थकेयर के भविष्य पर की चर्चा

Highlights: इस आर्टिकल में क्या है?

  • ईएमसी (EMC) द्वारा आयोजित भव्य डॉक्टर्स एंड बिज़नेस लीडर्स कॉन्क्लेव की पूरी रिपोर्ट।
  • हेल्थकेयर सेक्टर और कॉर्पोरेट वर्ल्ड के बीच बढ़ते सिनर्जी (Synergy) पर विशेषज्ञों के विचार।
  • मेडिकल और बिज़नेस जगत के दिग्गजों के बीच नेटवर्किंग के नए अवसर।
  • भारतीय अर्थव्यवस्था में हेल्थकेयर सेक्टर का योगदान और भविष्य की रणनीतियां।

बिज़नेस कॉन्क्लेव का आयोजन जब बड़े स्तर पर किया जाता है, तो इसके पीछे केवल व्यावसायिक उद्देश्य नहीं बल्कि एक गहरा सामाजिक और आर्थिक दृष्टिकोण होता है। हाल ही में ईएमसी (EMC) द्वारा आयोजित ‘डॉक्टर्स एंड बिज़नेस लीडर्स कॉन्क्लेव’ ने इसी विचारधारा को चरितार्थ किया है। इस इवेंट ने न केवल चिकित्सा जगत के चमकते सितारों को एक मंच पर लाया, बल्कि बिजनेस वर्ल्ड के प्रभावशाली लीडर्स को भी उनके साथ बैठकर भविष्य की योजनाएं बनाने का अवसर दिया।

स्वास्थ्य और व्यापार का बढ़ता संगम: एक नई पहल

आज के दौर में हेल्थकेयर केवल एक सेवा मात्र नहीं रह गई है, बल्कि यह ग्लोबल इकोनॉमी का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है। ईएमसी (EMC) द्वारा आयोजित इस बिज़नेस कॉन्क्लेव में इसी बात पर जोर दिया गया कि कैसे मेडिकल प्रोफेशनल्स और कॉर्पोरेट हाउसेस मिलकर एक सस्टेनेबल इकोसिस्टम बना सकते हैं। जब डॉक्टर अपनी एक्सपर्टाइज देते हैं और बिजनेस लीडर्स अपना मैनेजमेंट विजन, तो परिणाम स्वरूप समाज को बेहतर सुविधाएं और निवेशकों को अच्छा रिटर्न मिलता है।

इस कॉन्क्लेव में शामिल हुए कई बड़े हॉस्पिटल ग्रुप्स के सीईओ और जाने-माने सर्जन्स ने इस बात को स्वीकारा कि बिना प्रोफेशनल मैनेजमेंट के मॉडर्न हेल्थकेयर इन्फ्रास्ट्रक्चर खड़ा करना नामुमकिन है। भारत जैसे विकासशील देश में, जहाँ timesnews360.com जैसी न्यूज़ पोर्टल्स लगातार ग्रोथ की खबरें दे रही हैं, वहां ऐसे कोलबोरेटिव इवेंट्स की भूमिका बहुत बढ़ जाती है।

प्रसिद्ध वक्ताओं ने साझा किए अपने अनुभव

कॉन्क्लेव की शुरुआत दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुई, जिसके बाद ईएमसी के वरिष्ठ पदाधिकारियों ने इवेंट के मुख्य उद्देश्यों पर प्रकाश डाला। इस बिज़नेस कॉन्क्लेव में पैनल डिस्कशन का मुख्य विषय ‘हेल्थकेयर 2.0: टेक्नोलॉजी एंड इनोवेशन’ रखा गया था।

प्रमुख वक्ताविशेषज्ञतामुख्य विचार
डॉ. समीर खन्नाकार्डियोलॉजिस्टआर्टिफिशियल इंटेलिजेंस इन डायग्नोस्टिक्स
मिस्टर राहुल मेहताइन्वेस्टमेंट बैंकरहेल्थकेयर स्टार्टअप्स में फंडिंग की संभावनाएं
श्रीमती प्रिया राघवनहॉस्पिटल एडमिनिस्ट्रेटरपेशेंट केयर और डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन

डिजिटल क्रांति और हेल्थकेयर सेक्टर

इस बिज़नेस कॉन्क्लेव के दौरान एक सबसे महत्वपूर्ण चर्चा डिजिटल हेल्थ रिकॉर्ड्स और टेलीमेडिसिन पर हुई। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले 5 सालों में भारत का हेल्थकेयर मार्केट काफी हद तक डिजिटल हो जाएगा। सरकार की National Health Authority की योजनाओं का जिक्र करते हुए यह बताया गया कि कैसे आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन इस पूरे सेक्टर को बदल रहा है।

बिजनेस लीडर्स ने स्पष्ट किया कि अब हेल्थकेयर में निवेश केवल हॉस्पिटल की बिल्डिंग बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि अब डेटा एनालिटिक्स और रिमोट मॉनिटरिंग डिवाइसेस पर ज्यादा फोकस किया जा रहा है। स्टार्टअप्स इस क्षेत्र में नए-नए आइडियाज लेकर आ रहे हैं, जिन्हें बड़े कॉर्पोरेट्स द्वारा सपोर्ट किया जा रहा है।

नेटवर्किंग और पार्टनरशिप के नए आयाम

एक सफल बिज़नेस कॉन्क्लेव की पहचान उसकी नेटवर्किंग से होती है। ईएमसी के इस प्रोग्राम में डॉक्टर्स को यह समझने का मौका मिला कि वे अपनी क्लीनिकल प्रैक्टिस के साथ-साथ एक एंटरप्रेन्योर (Entrepreneur) के रूप में कैसे उभर सकते हैं। वहीं, बिजनेस लीडर्स को यह समझ आया कि हेल्थकेयर सेक्टर की बारीकियाँ क्या हैं और यहाँ निवेश करने के रिस्क और रिवॉर्ड्स क्या हो सकते हैं।

हेल्थकेयर इकोनॉमी: आंकड़े क्या कहते हैं?

अगर हम ग्लोबल लेवल पर देखें, तो मेडिकल टूरिज्म और फार्मास्यूटिकल एक्सपोर्ट्स में भारत की हिस्सेदारी बढ़ रही है। ईएमसी के इस बिज़नेस कॉन्क्लेव में बताया गया कि भारत अब केवल एक ‘बैक ऑफिस’ नहीं रह गया है, बल्कि यह एक ‘हेल्थ डेस्टिनेशन’ बन रहा है। टियर-2 और टियर-3 शहरों में बढ़ते मल्टी-स्पेशलिटी हॉस्पिटल्स इस बात का प्रमाण हैं कि अब हेल्थकेयर बिजनेस का विस्तार केवल मेट्रो शहरों तक सीमित नहीं है।

आगामी चुनौतियां और समाधान

किसी भी क्षेत्र के विकास में चुनौतियां तो आती ही हैं। इस बिज़नेस कॉन्क्लेव में हेल्थकेयर सेक्टर के सामने खड़ी चुनौतियों जैसे कि स्किल्ड मैनपावर की कमी, हाई कॉस्ट ऑफ इक्विपमेंट्स और रेगुलेटरी कंप्लायंस पर भी खुलकर चर्चा हुई। कॉर्पोरेट लीडर्स ने सुझाव दिया कि पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP Model) के जरिए इन समस्याओं का समाधान निकाला जा सकता है।

निष्कर्ष: एक उज्जवल भविष्य की ओर

ईएमसी (EMC) द्वारा आयोजित यह बिज़नेस कॉन्क्लेव आने वाले समय में एक मील का पत्थर साबित होगा। इस इवेंट ने यह स्पष्ट कर दिया है कि डॉक्टर्स और बिजनेस लीडर्स अब अलग-अलग रास्तों पर नहीं चल सकते। अगर हमें ‘विकसित भारत’ के सपने को सच करना है, तो हमें एक ऐसा हेल्थकेयर सिस्टम बनाना होगा जो किफायती भी हो और आधुनिक भी।

इस कॉन्क्लेव का समापन एक विजन स्टेटमेंट के साथ हुआ, जिसमें हेल्थकेयर इनोवेशन और एथिकल बिजनेस प्रैक्टिसेज को बढ़ावा देने का संकल्प लिया गया। इस प्रकार के बिज़नेस कॉन्क्लेव न केवल ज्ञान का आदान-प्रदान करते हैं, बल्कि नए रिश्तों की बुनियाद भी रखते हैं।

अंत में, यह कहना गलत नहीं होगा कि जब मेडिसिन की शक्ति और बिजनेस की बुद्धि मिलती है, तो चमत्कार होते हैं। ईएमसी की इस पहल की सराहना पूरे उत्तर भारत के मेडिकल और बिज़नेस सर्किल में हो रही है। इस बिज़नेस कॉन्क्लेव की सफलता यह दर्शाती है कि समाज अब एक होलिस्टिक एप्रोच की ओर बढ़ रहा है जहाँ स्वास्थ्य और समृद्धि साथ-साथ चलते हैं।

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