Highlights: इस आर्टिकल में क्या है?
- क्या पाकिस्तान की सड़कों पर चलती हैं टाटा और महिंद्रा की कारें?
- भारत और पाकिस्तान के कार मार्केट का सबसे बड़ा अंतर।
- पाकिस्तान में कौन सी ऑटोमोबाइल कंपनियां कर रही हैं राज?
- क्यों पाकिस्तान में गाड़ियां भारत के मुकाबले बहुत महंगी हैं?
- मारुति सुजुकी और पाक सुजुकी का क्या है कनेक्शन?
कार बाजार की जब भी बात होती है, तो भारतीय ऑटोमोबाइल सेक्टर का नाम दुनिया के टॉप देशों में आता है। भारत आज दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा ऑटो मार्केट बन चुका है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि हमारे पड़ोसी देश पाकिस्तान में कारों का क्या हाल है? क्या वहां भी भारत की तरह ‘Made in India’ कारें शोरूम में चमकती हैं? या फिर वहां का मार्केट पूरी तरह अलग है? आज के इस स्पेशल आर्टिकल में हम कार बाजार के उन पहलुओं को खंगालेंगे जो सरहद पार की ऑटो इंडस्ट्री की सच्चाई बयान करते हैं।
पाकिस्तान में भारतीय कारों की एंट्री का सच
सबसे पहले इस सवाल का जवाब जान लेते हैं कि क्या पाकिस्तान में भारत की कारें बिकती हैं? सीधे तौर पर कहें तो ‘नहीं’। साल 2019 में जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 हटने के बाद पाकिस्तान ने भारत के साथ द्विपक्षीय व्यापार (Bilateral Trade) पूरी तरह सस्पेंड कर दिया था। इसके बाद से भारत से किसी भी तरह की कार या स्पेयर पार्ट्स का एक्सपोर्ट पाकिस्तान को नहीं होता है। हालांकि, 2019 से पहले भी पाकिस्तान का कार बाजार भारतीय कारों के लिए बहुत ज्यादा खुला नहीं था, क्योंकि वहां की सरकार ने इम्पोर्ट ड्यूटी और लोकल असेंबली को लेकर बहुत कड़े नियम बना रखे थे।
लेकिन एक दिलचस्प बात यह है कि पाकिस्तान में जो कारें बिकती हैं, उनमें से कई मॉडल्स भारत में मिलने वाले मॉडल्स से मिलते-जुलते हैं। इसका कारण यह है कि सुजुकी, टोयोटा और होंडा जैसी जापानी कंपनियां दोनों देशों में काम करती हैं। बस फर्क इतना है कि भारत में ये कंपनियां बहुत एडवांस हो चुकी हैं, जबकि पाकिस्तान में अभी भी पुराने डिजाइन्स और बेसिक फीचर्स वाली गाड़ियां ज्यादा चलन में हैं।
पाकिस्तान के कार बाजार पर किसका है कब्जा?
पाकिस्तान के ऑटोमोबाइल सेक्टर में ‘Big Three’ का राज चलता है। ये तीन कंपनियां हैं: Pak Suzuki, Indus Motor Company (Toyota), और Atlas Honda।
1. पाक सुजुकी (Pak Suzuki)
पाकिस्तान के कार बाजार में सुजुकी का वही हाल है जो भारत में मारुति सुजुकी का है। वहां के मिडिल क्लास की पहली पसंद सुजुकी ही है। भारत में जहां ‘मारुति 800’ सालों पहले बंद हो गई, पाकिस्तान में उसका अपग्रेडेड वर्जन ‘मेहरान’ 2019 तक धड़ल्ले से बिका। फिलहाल वहां सुजुकी ऑल्टो (660cc) सबसे ज्यादा बिकने वाली कार है। वहां की ऑल्टो भारत वाली ऑल्टो से इंजन और लुक में काफी अलग है।
2. इंडस मोटर (Toyota Pakistan)
टोयोटा पाकिस्तान में स्टेटस सिंबल माना जाता है। वहां की कोरोला और फॉर्च्यूनर काफी पॉपुलर हैं। भारत में जहां सेडान सेगमेंट थोड़ा कम हुआ है, पाकिस्तान के कार बाजार में आज भी टोयोटा कोरोला की जबरदस्त डिमांड है।
3. एटलस होंडा (Honda Pakistan)
होंडा सिटी और होंडा सिविक पाकिस्तान के रईसों और अपर मिडिल क्लास की पसंदीदा गाड़ियां हैं। वहां होंडा सिविक को काफी मॉडिफाई करके चलाया जाता है और यह वहां के युवाओं के बीच एक ‘क्रेज’ की तरह है।
भारतीय कार बाजार vs पाकिस्तानी कार बाजार: जमीन आसमान का फर्क
अगर हम दोनों देशों के कार बाजार की तुलना करें, तो भारत बहुत आगे निकल चुका है। भारत में आज टाटा मोटर्स और महिंद्रा जैसी स्वदेशी कंपनियां ग्लोबल लेवल पर टक्कर दे रही हैं। भारत में सेफ्टी रेटिंग्स (Global NCAP) पर बहुत फोकस किया जाता है, जबकि पाकिस्तान में आज भी कई ऐसी कारें बेची जा रही हैं जिनमें बेसिक सेफ्टी फीचर्स जैसे एयरबैग्स भी सभी मॉडल्स में स्टैंडर्ड नहीं हैं।
अधिक जानकारी के लिए आप Automotive industry in Pakistan पर विकिपीडिया पेज देख सकते हैं। भारत में जहां इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) का रिवोल्यूशन आ रहा है, पाकिस्तान में अभी भी पेट्रोल की आसमान छूती कीमतों के बीच लोग सीएनजी और हाइब्रिड कारों के लिए तरस रहे हैं।
पाकिस्तान में कारों की कीमतें सुन उड़ जाएंगे आपके होश
पाकिस्तान के कार बाजार की सबसे बड़ी समस्या है वहां की करेंसी (PKR) की गिरती वैल्यू और भारी टैक्स। भारत में जो कार आपको 10-12 लाख रुपये में मिल जाती है, पाकिस्तान में उसकी कीमत 40 से 50 लाख रुपये (पाकिस्तानी रुपया) तक पहुंच जाती है।
| Car Model | Estimated Price in Pakistan (PKR) | India Equivalent / Price (INR) |
|---|---|---|
| Suzuki Alto | 23 – 30 Lakh | 4 – 6 Lakh |
| Toyota Corolla | 60 – 75 Lakh | N/A (Discontinued) |
| Honda Civic | 80 Lakh – 1 Crore | 20 – 25 Lakh (Expected) |
| Fortuner | 1.6 – 2 Crore | 35 – 55 Lakh |
जैसा कि आप इस टेबल में देख सकते हैं, वहां एक आम आदमी के लिए नई कार खरीदना किसी सपने से कम नहीं है। यही वजह है कि वहां का सेकंड हैंड कार बाजार बहुत ज्यादा एक्टिव है। लोग पुरानी जापानी इम्पोर्टेड कारों (JDM Cars) को खरीदना ज्यादा पसंद करते हैं।
चीन की कंपनियों की बढ़ती एंट्री
भारत और पाकिस्तान के रिश्तों में खटास का फायदा चीन की कंपनियों ने उठाया है। पिछले कुछ सालों में पाकिस्तान के कार बाजार में चंगान (Changan), एमजी (MG), और चेरी (Chery) जैसी चीनी कंपनियों ने अपने पैर जमाए हैं। पाकिस्तान सरकार ने ‘Auto Policy 2016-21’ के तहत नई कंपनियों को काफी इंसेंटिव्स दिए थे, जिसके बाद हुंडई और किया (Kia) ने भी वहां दोबारा एंट्री की। किया स्पोर्टेज (Kia Sportage) वहां की सड़कों पर काफी नजर आती है।
भारत की ‘टाटा’ और ‘महिंद्रा’ वहां क्यों नहीं?
अक्सर लोग पूछते हैं कि क्या टाटा सफारी या महिंद्रा थार पाकिस्तान में मिल सकती है? इसका सीधा जवाब है- नहीं। ट्रेड बैन की वजह से ये गाड़ियां वहां आधिकारिक तौर पर नहीं बेची जा सकतीं। अगर कोई वहां इन गाड़ियों को चलाना भी चाहे, तो उसे तीसरे देश (जैसे दुबई) के जरिए प्राइवेट इम्पोर्ट करना होगा, जो इतना महंगा पड़ता है कि उसमें वहां एक लग्जरी मर्सिडीज आ जाए। इसके अलावा, पाकिस्तान के कार बाजार में स्पेयर पार्ट्स की उपलब्धता न होना भी एक बड़ा कारण है कि वहां भारतीय ब्रांड्स सर्वाइव नहीं कर पाएंगे जब तक कि व्यापारिक रिश्ते सुधर न जाएं।
आर्थिक संकट और कार मार्केट का बुरा हाल
पिछले एक-दो साल से पाकिस्तान की इकोनॉमी जिस दौर से गुजर रही है, उसका सबसे बुरा असर वहां के कार बाजार पर पड़ा है। डॉलर की कमी के कारण कंपनियां पार्ट्स इम्पोर्ट नहीं कर पा रही हैं, जिसकी वजह से इंडस मोटर और पाक सुजुकी को कई बार अपने प्लांट हफ्तों तक बंद रखने पड़े हैं। वहीं भारत में ऑटोमोबाइल सेक्टर हर महीने सेल्स के नए रिकॉर्ड बना रहा है। टाइम्स न्यूज़ 360 की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में एसयूवी सेगमेंट की डिमांड में 25% की बढ़ोतरी देखी गई है, जबकि पाकिस्तान में लोग अब छोटी हैचबैक खरीदने की स्थिति में भी नहीं रहे।
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निष्कर्ष
पाकिस्तान का कार बाजार फिलहाल एक मुश्किल दौर से गुजर रहा है। जहां भारत में हम लग्जरी, सेफ्टी और टेक्नोलॉजी की बात करते हैं, वहां पाकिस्तान में लोग अभी भी गाड़ियों की बढ़ती कीमतों और पेट्रोल के भाव से परेशान हैं। भारतीय कारें (जैसे टाटा और महिंद्रा) अपनी मजबूती के लिए जानी जाती हैं, लेकिन राजनीतिक तनाव के कारण सरहद पार के लोग इन शानदार मशीनों का अनुभव नहीं ले पा रहे हैं। आने वाले समय में अगर हालात सुधरते हैं, तो शायद भारतीय ऑटो कंपनियां वहां के मार्केट को पूरी तरह बदल सकती हैं, क्योंकि भारतीय गाड़ियां किफायती होने के साथ-साथ अब दुनिया में सबसे सुरक्षित भी मानी जा रही हैं।
उम्मीद है कि कार बाजार पर आधारित यह विस्तृत रिपोर्ट आपको पसंद आई होगी। ऐसी ही ऑटोमोबाइल और बिज़नेस जगत की खबरों के लिए जुड़े रहिए हमारे साथ।
