फिल्म सिटी

फिल्म सिटी: उत्तर प्रदेश की नई फिल्म पॉलिसी से हिलेगा बॉलीवुड? क्षेत्रीय सिनेमा को मिली बड़ी सौगात

  • Highlights: इस आर्टिकल में क्या है?
  • उत्तर प्रदेश सरकार की नई फिल्म पॉलिसी और सब्सिडी के नियम।
  • क्षेत्रीय सिनेमा (Bhojpuri, Awadhi, Braj) को मिलने वाले विशेष लाभ।
  • नोएडा फिल्म सिटी का लेटेस्ट स्टेटस और बॉलीवुड से तुलना।
  • UP कैसे बन रहा है फिल्ममेकर्स की पहली पसंद।
  • स्थानीय कलाकारों के लिए रोजगार के नए अवसर।

फिल्म सिटी उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का एक ऐसा ड्रीम प्रोजेक्ट है, जो न केवल राज्य की आर्थिक स्थिति को बदलेगा, बल्कि भारतीय सिनेमा के इतिहास में एक नया अध्याय भी लिखेगा। हाल ही में अमर उजाला की एक रिपोर्ट के अनुसार, उत्तर प्रदेश सरकार ने क्षेत्रीय कला और फिल्मों को प्रमोट करने के लिए अपनी सब्सिडी नीतियों में बड़े बदलाव किए हैं। यह कदम सीधे तौर पर मुंबई स्थित बॉलीवुड को एक कड़ी टक्कर देने और फिल्ममेकर्स को ‘यूपी की ओर’ आकर्षित करने के लिए उठाया गया है।

UP की नई फिल्म पॉलिसी: क्या है खास?

उत्तर प्रदेश सरकार ने अपनी नई फिल्म नीति के जरिए यह साफ कर दिया है कि वे केवल बड़े बजट की फिल्मों को ही नहीं, बल्कि जमीन से जुड़ी कहानियों को भी सपोर्ट करना चाहते हैं। फिल्म सिटी के निर्माण के साथ-साथ, सरकार ने घोषणा की है कि जो फिल्में उत्तर प्रदेश की क्षेत्रीय भाषाओं (जैसे भोजपुरी, ब्रज, बुंदेली और अवधी) में बनेंगी, उन्हें अतिरिक्त आर्थिक मदद यानी सब्सिडी दी जाएगी।

यह सब्सिडी केवल कैमरा रेंटल या शूटिंग लोकेशन तक सीमित नहीं है, बल्कि पोस्ट-प्रोडक्शन और लोकल कलाकारों को हायर करने पर भी लागू होती है। अगर कोई फिल्ममेकर अपनी फिल्म की 50% से अधिक शूटिंग यूपी में करता है, तो वह भारी-भरकम छूट का हकदार बन जाता है। इस विजन के पीछे का मकसद उत्तर प्रदेश को भारत का ‘कंटेंट हब’ बनाना है।

क्षेत्रीय सिनेमा को मिलेगा बूस्ट

अभी तक क्षेत्रीय सिनेमा को अक्सर बजट की कमी के कारण समझौता करना पड़ता था। लेकिन अब फिल्म सिटी के माध्यम से मिलने वाली सब्सिडी ने छोटे प्रोड्यूसर्स के हौसले बुलंद कर दिए हैं। उत्तर प्रदेश सरकार का मानना है कि राज्य की संस्कृति इतनी समृद्ध है कि अगर इसे सही प्लेटफॉर्म मिले, तो यह ग्लोबल लेवल पर अपनी पहचान बना सकती है।

भोजपुरी फिल्म इंडस्ट्री, जिसका टर्नओवर पहले से ही करोड़ों में है, इस पॉलिसी का सबसे बड़ा लाभार्थी बनकर उभर रही है। इसके अलावा, अवधी और बुंदेली भाषा की कहानियों को भी अब बड़े पर्दे पर जगह मिलने लगी है। सरकार का यह मास्टरस्ट्रोक न केवल कला को बचाएगा, बल्कि स्थानीय टैलेंट को माइग्रेट होने से भी रोकेगा।

फिल्म सिटी और बॉलीवुड का मुकाबला

जब हम फिल्म निर्माण की बात करते हैं, तो जुबान पर सबसे पहला नाम मुंबई आता है। लेकिन अब समीकरण बदल रहे हैं। नोएडा में बन रही इंटरनेशनल फिल्म सिटी को दुनिया के बेहतरीन इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ डिजाइन किया जा रहा है। यहाँ स्टूडियो, आउटडोर लोकेशंस, और फिल्म प्रोसेसिंग लैब्स सब एक ही छत के नीचे होंगे।

बॉलीवुड के कई बड़े डायरेक्टर्स ने पहले ही यूपी में अपनी फिल्मों की शूटिंग शुरू कर दी है। ‘मिर्जापुर’, ‘पंचायत’ और ‘आर्टिकल 15’ जैसी प्रोजेक्ट्स ने यह साबित कर दिया है कि यूपी की लोकेशंस में एक अलग तरह की असलियत (Authenticity) है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इसी रफ्तार से काम चलता रहा, तो आने वाले 5-10 सालों में फिल्म सिटी नोएडा, मुंबई के फिल्म सिटी को कड़ी चुनौती देगी।

सब्सिडी स्ट्रक्चर पर एक नजर (Table)

श्रेणी (Category)सब्सिडी का प्रतिशत (Approx)शर्तें (Conditions)
क्षेत्रीय फिल्में (Bhojpuri/Awadhi/Braj)50% तकअधिकतम शूटिंग यूपी में होनी चाहिए
हिंदी/इंग्लिश फिल्में25% – 35%लोकल आर्टिस्ट्स का अनिवार्य उपयोग
वेब सीरीज (OTT)₹1 करोड़ तकयूपी की लोकेशंस को प्रमोट करना
इंटरनेशनल प्रोजेक्ट्सविशेष पैकेजसरकार के साथ सीधा एमओयू

ऊपर दी गई टेबल से स्पष्ट है कि सरकार का मुख्य फोकस क्षेत्रीय कंटेंट पर है। फिल्म सिटी के माध्यम से मिलने वाली यह वित्तीय सहायता छोटे फिल्ममेकर्स के लिए किसी संजीवनी से कम नहीं है। अधिक जानकारी के लिए आप Noida Film City के बारे में विस्तार से पढ़ सकते हैं।

स्थानीय कलाकारों और रोजगार पर प्रभाव

किसी भी फिल्म प्रोजेक्ट में केवल एक्टर्स ही नहीं होते, बल्कि हजारों की संख्या में क्रू मेंबर्स, स्पॉट बॉय, लाइटमेन और मेकअप आर्टिस्ट्स की जरूरत होती है। जब से यूपी में फिल्म सिटी की चर्चा तेज हुई है, स्थानीय युवाओं में एक नई उम्मीद जगी है। अब उन्हें काम की तलाश में मुंबई के वर्सोवा या अंधेरी के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे।

उत्तर प्रदेश सरकार ने कौशल विकास केंद्रों के जरिए फिल्म निर्माण से जुड़े शॉर्ट-टर्म कोर्सेज भी शुरू किए हैं। इसका मतलब है कि जब फिल्म शूटिंग शुरू होगी, तो क्रू के अधिकांश सदस्य यूपी के ही होंगे। इससे न केवल बेरोजगारी कम होगी, बल्कि राज्य की GDP में भी एंटरटेनमेंट सेक्टर का बड़ा योगदान होगा। आप लेटेस्ट अपडेट्स के लिए TimesNews360 को फॉलो कर सकते हैं।

टेक्नोलॉजी और इनोवेशन का संगम

नोएडा की इस नई फिल्म सिटी में केवल पारंपरिक शूटिंग फ्लोर ही नहीं होंगे, बल्कि यहाँ हाई-टेक VFX स्टूडियो और डेटा सेंटर भी बनाए जा रहे हैं। आज के समय में जब फिल्में विजुअल इफेक्ट्स पर ज्यादा निर्भर हैं, ऐसे में यूपी सरकार का यह विजन गेम-चेंजर साबित हो सकता है।

बॉलीवुड के बड़े प्रोडक्शन हाउस जैसे धर्मा प्रोडक्शंस और रेड चिलीज भी उत्तर प्रदेश की ओर देख रहे हैं क्योंकि यहाँ जमीन सस्ती है, लेबर कॉस्ट कम है और अब सरकार की ओर से सब्सिडी का भी बड़ा फायदा मिल रहा है। यह एक ‘Win-Win’ सिचुएशन है।

निष्कर्ष: उत्तर प्रदेश बनेगा नया एंटरटेनमेंट हब?

अंत में, यह कहना गलत नहीं होगा कि फिल्म सिटी प्रोजेक्ट केवल ईंट और पत्थरों की इमारत नहीं है, बल्कि करोड़ों लोगों की उम्मीदों का केंद्र है। क्षेत्रीय सिनेमा को दी जाने वाली अतिरिक्त सब्सिडी ने यूपी को एक ‘Preferred Destination’ बना दिया है।

बॉलीवुड को टक्कर देने की बात अभी भले ही दूर की लगे, लेकिन जिस तरह से योगी सरकार ने पॉलिसी मेकिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर पर ध्यान दिया है, वह दिन दूर नहीं जब उत्तर प्रदेश भारतीय सिनेमा का नया पावरहाउस कहलाएगा। क्षेत्रीय कला के लिए यह ‘स्वर्ण युग’ की शुरुआत है। फिल्म सिटी का यह सफर आने वाले समय में देश के एंटरटेनमेंट बिजनेस का चेहरा पूरी तरह बदल कर रख देगा।

उत्तर प्रदेश का यह बदलाव न केवल बॉलीवुड के लिए एक विकल्प खड़ा कर रहा है, बल्कि भारतीय संस्कृति के उन पहलुओं को भी सामने ला रहा है जो अब तक फिल्मों में कहीं खो गए थे। क्षेत्रीय भाषाओं को मिल रहा यह सम्मान और आर्थिक सहयोग वास्तव में काबिले तारीफ है।

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