नंद किशोर गोयनका का निधन भारतीय बिजनेस जगत और विशेष रूप से एस्सेल ग्रुप (Essel Group) के लिए एक युग का अंत है। एस्सेल ग्रुप के चेयरमैन और राज्यसभा के पूर्व सदस्य डॉ. सुभाष चंद्रा के पूज्य पिता श्री नंद किशोर गोयनका जी अब हमारे बीच नहीं रहे। उनके जाने की खबर से पूरे देश के कॉर्पोरेट, मीडिया और राजनीतिक हलकों में शोक की लहर दौड़ गई है। वह एक ऐसे विजनरी व्यक्ति थे जिन्होंने अपने बच्चों को न केवल बिजनेस के गुर सिखाए, बल्कि उन्हें जमीन से जुड़े रहकर आसमान छूने की प्रेरणा भी दी।
Highlights: इस आर्टिकल में क्या है?
- एक युग का अंत: श्री नंद किशोर गोयनका जी के जीवन और उनके संघर्षों का सफर।
- पारिवारिक विरासत: एस्सेल ग्रुप और गोयनका परिवार को खड़ा करने में उनकी भूमिका।
- अनिल सिंघवी की श्रद्धांजलि: ज़ी बिजनेस के मैनेजिंग एडिटर अनिल सिंघवी ने किस तरह उन्हें याद किया।
- काम की बात: आम भारतीय परिवारों के लिए उनके जीवन से मिलने वाली अनमोल सीख।
श्री नंद किशोर गोयनका जी का जीवन सफर: सादगी और उच्च विचार
नंद किशोर गोयनका का निधन सिर्फ एक व्यक्ति का जाना नहीं है, बल्कि उस पीढ़ी के एक महान स्तंभ का ढहना है जिसने आजाद भारत में नए व्यवसायों की नींव रखी थी। हरियाणा के हिसार से शुरू हुआ उनका सफर आज वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बना चुका है। नंद किशोर जी हमेशा सादगी और कठोर परिश्रम में विश्वास रखते थे। उनके करीबी लोग बताते हैं कि बिजनेस की दुनिया में इतनी बड़ी सफलता हासिल करने के बाद भी उनके पैर हमेशा जमीन पर रहे।
उन्होंने अपने बेटों—डॉ. सुभाष चंद्रा, लक्ष्मी नारायण गोयल, जवाहर गोयल और अशोक गोयल—को हमेशा यह सिखाया कि व्यापार में ईमानदारी और समाज के प्रति जिम्मेदारी सबसे ऊपर होनी चाहिए। आज एस्सेल ग्रुप का जो विशाल साम्राज्य हम देख रहे हैं, उसकी असली बुनियाद नंद किशोर गोयनका जी के ही नैतिक मूल्यों पर टिकी हुई है।
Anil Singhvi ने दी Emotional श्रद्धांजलि
जैसे ही सोशल मीडिया पर नंद किशोर गोयनका का निधन की खबर फैली, ज़ी बिजनेस के मैनेजिंग एडिटर अनिल सिंघवी (Anil Singhvi) ने अपने ट्विटर (X) हैंडल और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के जरिए गहरा दुख व्यक्त किया। अनिल सिंघवी ने लिखा कि नंद किशोर गोयनका जी का जाना गोयनका परिवार और पूरे एस्सेल ग्रुप के लिए एक अपूरणीय क्षति है।
मार्केट एक्सपर्ट और एंकर अनिल सिंघवी ने अपने संदेश में कहा कि नंद किशोर गोयनका जी एक ऐसे मार्गदर्शक थे, जिनकी छत्रछाया में कई पीढ़ियों ने बिजनेस और जीवन के सही मायने सीखे। उन्होंने डॉ. सुभाष चंद्रा और पूरे गोयनका परिवार के प्रति अपनी गहरी संवेदनाएं व्यक्त कीं और ईश्वर से प्रार्थना की कि वे दिवंगत आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दें।
गोयनका परिवार का भारतीय मीडिया और बिजनेस में योगदान
जब हम एस्सेल ग्रुप की बात करते हैं, तो हमारे दिमाग में भारत का पहला प्राइवेट सैटेलाइट टीवी चैनल ‘Zee TV’ आता है। लेकिन इस विशाल मीडिया एम्पायर को खड़ा करने के पीछे जो पारिवारिक संस्कार थे, वे नंद किशोर गोयनका जी की ही देन थे। उन्होंने अपने जीवनकाल में कई उतार-चढ़ाव देखे, लेकिन कभी भी अपने सिद्धांतों से समझौता नहीं किया।
आज के आधुनिक दौर में, जहाँ पारिवारिक व्यवसाय बिखर जाते हैं, गोयनका परिवार ने हमेशा एकजुटता का परिचय दिया है। इस एकता और ताकत के पीछे नंद किशोर जी का ही आशीर्वाद था। उनका जाना न केवल उनके परिवार के लिए, बल्कि भारत के हर उस व्यक्ति के लिए दुखद है जो पारिवारिक मूल्यों में विश्वास रखता है। हमारे लाइफस्टाइल और पारिवारिक मूल्यों सेक्शन में हम अक्सर ऐसे महापुरुषों के जीवन से प्रेरणा लेने की बात करते हैं।
नंद किशोर गोयनका जी से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण तथ्य
नीचे दी गई टेबल के माध्यम से हम श्री नंद किशोर गोयनका जी और उनके परिवार से जुड़ी कुछ महत्वपूर्ण जानकारियों को संक्षेप में समझ सकते हैं:
| विवरण (Details) | जानकारी (Information) |
|---|---|
| नाम | श्री नंद किशोर गोयनका (Shri Nand Kishore Goenka) |
| मुख्य पहचान | पितामह – एस्सेल ग्रुप (Essel Group) |
| प्रसिद्ध सुपुत्र | डॉ. सुभाष चंद्रा (पूर्व राज्यसभा सांसद व चेयरमैन, एस्सेल ग्रुप) |
| मूल स्थान | हिसार, हरियाणा |
| जीवन के मूल मंत्र | सादगी, ईमानदारी, कठिन परिश्रम और पारिवारिक एकता |
| श्रद्धांजलि देने वाले प्रमुख व्यक्तित्व | अनिल सिंघवी (ज़ी बिजनेस), देश के दिग्गज उद्योगपति और राजनेता |
काम की बात: आज की पीढ़ी के लिए जीवन के बड़े सबक
नंद किशोर गोयनका का निधन हमें यह भी याद दिलाता है कि जीवन में असली सफलता केवल धन दौलत से नहीं, बल्कि आपके द्वारा छोड़ी गई लेगेसी (विरासत) और संस्कारों से मापी जाती है। उनके जीवन से हम निम्नलिखित बातें सीख सकते हैं:
- पारिवारिक एकता ही सबसे बड़ी शक्ति है: गोयनका परिवार ने हर मुश्किल वक्त में एक साथ खड़े रहकर दिखाया है कि यदि परिवार एकजुट हो, तो बड़े से बड़े संकट को टाला जा सकता है।
- जड़ों से जुड़े रहें: सफलता के शिखर पर पहुँचने के बाद भी अपनी जड़ों, अपनी संस्कृति और अपने लोगों को कभी नहीं भूलना चाहिए।
- मेंटरशिप का महत्व: एक पिता के रूप में नंद किशोर जी ने अपने बच्चों को केवल बिजनेस सौंपने के बजाय उन्हें आत्मनिर्भर और विजनरी बनाया।
आज के भागदौड़ भरे लाइफस्टाइल में, जहाँ लोग अक्सर अपने परिवार से दूर होते जा रहे हैं, नंद किशोर गोयनका जी का जीवन हमें सिखाता है कि परिवार और संस्कार ही हमारी असली पूंजी हैं।
एस्सेल ग्रुप के इस दुखद समय में, टाइम्सन्यूज360 की पूरी टीम गोयनका परिवार के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त करती है। ईश्वर दिवंगत आत्मा को शांति और शोक संतप्त परिवार को यह भारी दुख सहने की शक्ति प्रदान करे। ॐ शांति!
FAQ
Q1. नंद किशोर गोयनका जी कौन थे?
श्री नंद किशोर गोयनका जी भारत के प्रसिद्ध बिजनेस घराने एस्सेल ग्रुप (Essel Group) के पितामह और समूह के चेयरमैन डॉ. सुभाष चंद्रा के पूज्य पिता थे। वे अपने सादा जीवन और उच्च विचारों के लिए जाने जाते थे।
Q2. अनिल सिंघवी ने उनके निधन पर क्या कहा?
ज़ी बिजनेस के मैनेजिंग एडिटर अनिल सिंघवी ने सोशल मीडिया पर बेहद भावुक पोस्ट साझा करते हुए इसे गोयनका परिवार और भारतीय उद्योग जगत के लिए एक अपूरणीय क्षति बताया। उन्होंने डॉ. सुभाष चंद्रा और पूरे परिवार के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की।
Q3. नंद किशोर गोयनका जी के जीवन से हमें क्या सीख मिलती है?
उनके जीवन से हमें यह सीख मिलती है कि चाहे बिजनेस में कितनी भी बड़ी सफलता क्यों न मिल जाए, इंसान को हमेशा अपनी जड़ों से जुड़े रहना चाहिए और पारिवारिक मूल्यों व एकता को सबसे ऊपर रखना चाहिए।
