NCERT विवाद आज देश के एजुकेशनल और पॉलिटिकल हलकों में सबसे बड़ी चर्चा का विषय बन गया है। जब बात बच्चों के सिलेबस और देश के गौरवशाली इतिहास की हो, तो सरकार और शिक्षा मंत्रालय का रुख बेहद संजीदा हो जाता है। हाल ही में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस पूरे मामले पर अपनी चुप्पी तोड़ते हुए एक बेहद स्ट्रॉन्ग मैसेज दिया है। उन्होंने साफ कर दिया है कि मोदी सरकार न्यायपालिका का पूरा सम्मान करती है और अगर सिलेबस या किताबों में किसी भी स्तर पर कोई बड़ी चूक हुई है, तो इसके लिए जिम्मेदार लोगों को बख्शा नहीं जाएगा।
Highlights: इस आर्टिकल में क्या है?
- शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का NCERT विवाद पर आधिकारिक रुख।
- न्यायपालिका और कोर्ट के आदेशों के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता।
- सिलेबस में बदलाव और उसमें हुई संभावित गड़बड़ियों का पूरा एनालिसिस।
- दोषियों पर होने वाले ऐक्शन और मंत्रालय की इंटरनल इंक्वायरी की जानकारी।
- छात्रों और पेरेंट्स पर इस पूरे विवाद का क्या असर होगा।
NCERT विवाद की जड़ें तब गहरी हुईं जब पिछले कुछ महीनों में टेक्स्टबुक्स से कुछ खास चैप्टर्स को हटाने या बदलने को लेकर सोशल मीडिया और पॉलिटिकल गलियारों में बहस छिड़ गई। विपक्ष ने आरोप लगाया कि सरकार इतिहास के साथ छेड़छाड़ कर रही है, वहीं सरकार का तर्क था कि यह ‘सिलेबस रेशनलाइजेशन’ का हिस्सा है ताकि छात्रों पर से बोझ कम किया जा सके। लेकिन मामला तब और गंभीर हो गया जब इसमें न्यायपालिका को दखल देना पड़ा। धर्मेंद्र प्रधान ने स्पष्ट किया कि ‘लॉ ऑफ द लैंड’ यानी कानून से ऊपर कोई नहीं है।
शिक्षा मंत्री का बयान: न्यायपालिका और सिस्टम की गरिमा
शिक्षा मंत्री ने एक हालिया प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि NCERT एक स्वायत्त संस्था है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि वह अकाउंटेबिलिटी से बाहर है। उन्होंने कहा, “हम न्यायपालिका के हर निर्देश का पालन करने के लिए तैयार हैं। NCERT विवाद को लेकर जो भी सवाल उठाए गए हैं, हमने उन पर एक हाई-लेवल कमेटी बनाई है। अगर कोई भी व्यक्ति या एक्सपर्ट जानबूझकर गलत जानकारी फैलाने या सिलेबस को मिसलीड करने का दोषी पाया जाता है, तो उस पर सख्त ऐक्शन लिया जाएगा।”
टाइम्सन्यूज360 ( timesnews360.com ) की रिपोर्ट के अनुसार, शिक्षा मंत्रालय अब उन सभी पैनल मेंबर्स की लिस्ट की जांच कर रहा है जिन्होंने पिछले दो सालों में सिलेबस रिव्यू में हिस्सा लिया था। सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि शिक्षा के मंदिर में कोई भी पॉलिटिकल एजेंडा छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ न कर पाए।
NCERT विवाद का बैकग्राउंड: आखिर हंगामा क्यों है?
पिछले साल NCERT ने क्लास 6 से 12 तक की किताबों में बड़े बदलाव किए थे। इसमें मुगल इतिहास, गुजरात दंगे और कुछ सामाजिक आंदोलनों से जुड़े अंशों को हटाया गया था। NCERT विवाद तब और बढ़ गया जब कुछ प्रख्यात शिक्षाविदों ने यह दावा किया कि उनके नाम का इस्तेमाल उनकी अनुमति के बिना किया गया है। मामला कोर्ट तक पहुंचा और अब सरकार बैकफुट पर नहीं बल्कि ‘ऐक्शन मोड’ में नजर आ रही है।
धर्मेंद्र प्रधान ने जोर देकर कहा कि नई शिक्षा नीति (NEP 2020) का उद्देश्य छात्रों को रटने वाली विद्या से निकालकर क्रिटिकल थिंकिंग की ओर ले जाना है। लेकिन इस प्रक्रिया में अगर कहीं भी फैक्ट्स के साथ समझौता हुआ है, तो उसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
सिलेबस में हुए प्रमुख बदलावों पर एक नजर
| विषय | कक्षा | मुख्य बदलाव / विवादित बिंदु |
|---|---|---|
| इतिहास | 12वीं | मुगल दरबार और उनके शासन से जुड़े कुछ चैप्टर्स हटाए गए। |
| पॉलिटिकल साइंस | 11वीं/12वीं | लोकतांत्रिक अधिकारों और जन आंदोलनों के कुछ अंशों को छोटा किया गया। |
| समाजशास्त्र | 10वीं | जाति और धर्म से जुड़ी कुछ संवेदनशील टिप्पणियों में बदलाव। |
क्या है सरकार का ‘ऐक्शन प्लान’?
NCERT विवाद को सुलझाने के लिए शिक्षा मंत्रालय ने तीन-स्तरीय रणनीति अपनाई है:
- एक्सपर्ट रिव्यू: पुराने सिलेबस और नए बदलावों की तुलना के लिए इंडिपेंडेंट स्कॉलर्स की एक टीम बनाई गई है।
- लीगल ओपिनियन: न्यायपालिका के निर्देशों को लागू करने के लिए सरकार की लीगल टीम NCERT के साथ मिलकर काम कर रही है।
- डिजिटल फीडबैक: अब किताबों में बदलाव करने से पहले पेरेंट्स और टीचर्स से डिजिटल फीडबैक लेने का सिस्टम शुरू किया जा रहा है।
शिक्षा मंत्री ने साफ किया कि NCERT विवाद को बेवजह तूल दिया जा रहा है, लेकिन अगर कहीं एडमिनिस्ट्रेटिव लेवल पर लापरवाही हुई है, तो जिम्मेदार अधिकारियों का ट्रांसफर या निलंबन भी हो सकता है। सरकार की प्राथमिकता एक ऐसी एजुकेशन व्यवस्था बनाना है जो ‘इंडियन वैल्यूज’ और ‘मॉडर्न साइंस’ का परफेक्ट ब्लेंड हो।
विपक्ष के आरोप और सरकार की सफाई
विपक्षी दलों का कहना है कि NCERT विवाद केवल सिलेबस रेशनलाइजेशन नहीं है, बल्कि यह देश के इतिहास को ‘भगवाकरण’ (Saffronization) की ओर ले जाने की कोशिश है। कांग्रेस और अन्य क्षेत्रीय दलों ने संसद में भी इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाया है। हालांकि, धर्मेंद्र प्रधान ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि NCERT की गाइडलाइन्स Official NCERT Website पर उपलब्ध हैं और सब कुछ पारदर्शी तरीके से किया गया है। उन्होंने चुनौती दी कि किसी भी गलत तथ्य को साबित किया जाए, सरकार उसे तुरंत सुधारने के लिए तैयार है।
छात्रों के भविष्य पर प्रभाव
इस पूरे NCERT विवाद के बीच सबसे ज्यादा असमंजस में छात्र और उनके माता-पिता हैं। बोर्ड एग्जाम्स के करीब आते ही सिलेबस में इस तरह की कंट्रोवर्सी बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर असर डालती है। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि विवादों के बजाय अब फोकस इस बात पर होना चाहिए कि क्या पढ़ाया जा रहा है और वह कॉम्पिटिटिव एग्जाम्स (जैसे JEE, NEET) के लिए कितना रेलिवेंट है।
धर्मेंद्र प्रधान ने आश्वासन दिया है कि किसी भी छात्र को पुरानी या नई किताबों के चक्कर में नुकसान नहीं होने दिया जाएगा। बोर्ड एग्जाम्स में केवल वही सवाल पूछे जाएंगे जो फाइनल नोटिफाइड सिलेबस का हिस्सा हैं।
निष्कर्ष: पारदर्शिता ही एकमात्र समाधान
अंत में, NCERT विवाद इस बात का संकेत है कि हमारे देश में शिक्षा को लेकर समाज कितना जागरूक है। जब तक सरकार, न्यायपालिका और शिक्षाविद एक पेज पर नहीं होंगे, तब तक ऐसी समस्याएं सामने आती रहेंगी। शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का यह बयान कि ‘जिम्मेदारों पर ऐक्शन होगा’, एक पॉजिटिव स्टेप है। इससे सिस्टम में लोगों का भरोसा बढ़ेगा और भविष्य में सिलेबस डिजाइन करते समय अधिक सावधानी बरती जाएगी।
शिक्षा केवल किताबों तक सीमित नहीं है, यह एक राष्ट्र के निर्माण की प्रक्रिया है। NCERT विवाद को खत्म करने के लिए यह जरूरी है कि शिक्षा को राजनीति के चश्मे से हटाकर देखा जाए। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि मंत्रालय उन ‘दोषियों’ के खिलाफ क्या कार्रवाई करता है जिनका जिक्र मंत्री जी ने अपनी स्पीच में किया है।
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