Highlights: इस आर्टिकल में क्या है?
- प्राकृतिक स्वास्थ्य के लिए योग गुरु अग्रवाल के टॉप मंत्र।
- उपवास (Fasting) कैसे शरीर को डिटॉक्स करता है?
- आज की मॉडर्न लाइफस्टाइल और प्राकृतिक जीवन का बैलेंस।
- योग और प्राणायाम के डेली रूटीन के फायदे।
- 7-डे नेचुरल डाइट चार्ट और लाइफस्टाइल गाइड।
प्राकृतिक स्वास्थ्य आज के इस भागदौड़ भरे ‘fast-paced life’ में कोई लग्जरी नहीं, बल्कि एक अनिवार्य आवश्यकता बन गया है। हाल ही में योग गुरु अग्रवाल ने दैनिक भास्कर के एक विशेष सत्र में यह स्पष्ट किया कि अगर हम अपनी जड़ों की ओर लौटें और योग, उपवास एवं सात्विक खान-पान को अपनाएं, तो ‘lifelong health’ पाना कोई मुश्किल काम नहीं है। आज की ‘Gen-Z’ और ‘Millennials’ पीढ़ी जिस तरह से ‘lifestyle diseases’ का शिकार हो रही है, उसे देखते हुए गुरुजी के ये सुझाव किसी ‘game changer’ से कम नहीं हैं।
प्राकृतिक स्वास्थ्य और योग का गहरा नाता
जब हम प्राकृतिक स्वास्थ्य की बात करते हैं, तो योग इसका सबसे महत्वपूर्ण स्तंभ होता है। योग गुरु अग्रवाल के अनुसार, योग सिर्फ शारीरिक व्यायाम (Physical Exercise) नहीं है, बल्कि यह शरीर, मन और आत्मा का एक ‘perfect alignment’ है। आजकल लोग जिम जाकर ‘heavy weights’ तो उठा लेते हैं, लेकिन उनके शरीर में वो ‘flexibility’ और मानसिक शांति नहीं होती जो योग से मिलती है।
गुरुजी कहते हैं कि हर व्यक्ति को दिन में कम से कम 45 मिनट खुद को देने चाहिए। इसमें सूर्य नमस्कार, कपालभाति और अनुलोम-विलोम जैसे प्राणायाम शामिल होने चाहिए। यह न केवल आपके ‘respiratory system’ को मजबूत करते हैं, बल्कि आपके ‘stress levels’ को भी कम करते हैं। योग के माध्यम से हम अपने शरीर के भीतर की ‘negative energy’ को बाहर निकाल सकते हैं और एक ‘vibrant life’ जी सकते हैं।
उपवास: शरीर की ‘Natural Servicing’
प्राकृतिक स्वास्थ्य को बनाए रखने के लिए ‘Upvas’ या उपवास एक अचूक दवा है। योग गुरु अग्रवाल का मानना है कि जैसे हम अपनी गाड़ियों की समय-समय पर सर्विसिंग कराते हैं, वैसे ही हमारे शरीर के ‘internal organs’ को भी आराम और सफाई की जरूरत होती है। जब हम उपवास करते हैं, तो शरीर की ‘healing energy’ पाचन के बजाय ‘cell repair’ और ‘detoxification’ पर ध्यान केंद्रित करती है।
आजकल ‘Intermittent Fasting’ का बहुत क्रेज है, लेकिन भारत में यह परंपरा सदियों पुरानी है। गुरुजी के अनुसार, हफ्ते में एक बार ‘liquid diet’ या केवल फलों पर रहना आपके ‘metabolism’ को ‘boost’ कर सकता है। इससे शरीर में जमा ‘toxins’ बाहर निकल जाते हैं और ‘skin’ पर एक नेचुरल ग्लो आता है।
डाइट और लाइफस्टाइल में छोटे बदलाव, बड़े परिणाम
प्राकृतिक स्वास्थ्य पाने के लिए आपकी किचन आपका सबसे बड़ा अस्पताल है। गुरुजी ने जोर दिया कि हमें ‘processed food’, ‘refined sugar’ और ‘excessive caffeine’ से दूरी बनानी चाहिए। ‘Organic’ और ‘Seasonal’ फल और सब्जियां आपके शरीर को वो जरूरी ‘micronutrients’ प्रदान करती हैं जिनकी कमी अक्सर ‘supplements’ से पूरी नहीं हो पाती।
यहाँ एक तुलनात्मक तालिका (Table) दी गई है जो मॉडर्न लाइफस्टाइल बनाम प्राकृतिक जीवनशैली के अंतर को दर्शाती है:
| विशेषता (Feature) | मॉडर्न लाइफस्टाइल (Modern) | प्राकृतिक जीवनशैली (Natural) |
|---|---|---|
| नींद (Sleep) | देर रात तक जागना, 6 घंटे से कम | जल्दी सोना, 7-8 घंटे की गहरी नींद |
| आहार (Diet) | Fast Food और Junk Food | सात्विक, ताजा और घर का बना भोजन |
| शारीरिक गतिविधि | बैठकर काम करना (Sedentary) | योग, पैदल चलना और व्यायाम |
| मानसिक स्थिति | Anxiety और Stress | शांति और ध्यान (Meditation) |
मेंटल हेल्थ और प्राकृतिक स्वास्थ्य
आज के दौर में प्राकृतिक स्वास्थ्य का मतलब सिर्फ शारीरिक फिटनेस नहीं है। ‘Mental Well-being’ इसका एक बहुत बड़ा हिस्सा है। योग गुरु अग्रवाल बताते हैं कि ‘anxiety’ और ‘depression’ जैसी समस्याएं तब पैदा होती हैं जब हम प्रकृति से दूर हो जाते हैं। सुबह की धूप (Sunlight) लेना, नंगे पैर घास पर चलना और गहरी सांस लेना—ये बहुत छोटे काम हैं लेकिन इनका असर बहुत गहरा होता है। अगर आप हेल्थ से जुड़ी और भी ज्ञानवर्धक बातें जानना चाहते हैं, तो TimesNews360 पर जरूर आएं।
प्राकृतिक स्वास्थ्य के लिए 7-डे रूटीन चार्ट
गुरुजी ने एक ‘simple’ लेकिन ‘effective’ रूटीन साझा किया है जिसे कोई भी फॉलो कर सकता है:
- सोमवार (Detox Day): सुबह गुनगुने पानी में नींबू और शहद लें। हल्का भोजन करें।
- मंगलवार (Yoga Focus): कम से कम 12 बार सूर्य नमस्कार करें।
- बुधवार (Hydration Day): नारियल पानी और ताजे फलों के जूस का सेवन बढ़ाएं।
- गुरुवार (Mindfulness): 15 मिनट मौन रहें और केवल अपनी सांसों पर ध्यान दें।
- शुक्रवार (Raw Food): दोपहर के भोजन में सलाद की मात्रा 50% रखें।
- शनिवार (Physical Activity): योग के साथ-साथ लंबी सैर पर जाएं।
- रविवार (Fasting/Light Diet): शाम का भोजन सूर्यास्त से पहले कर लें।
प्राकृतिक स्वास्थ्य की राह में सबसे बड़ी बाधा हमारा ‘procrastination’ यानी टालमटोल की आदत है। हम सोचते हैं कि कल से शुरू करेंगे, लेकिन वो कल कभी नहीं आता। योग गुरु अग्रवाल का कहना है कि शरीर एक मंदिर है और इसकी देखभाल करना आपकी पहली जिम्मेदारी है। जब आप ‘nature’ के साथ ‘sync’ में रहते हैं, तो बीमारियां आपसे कोसों दूर रहती हैं।
निष्कर्ष: एक नई शुरुआत
अंत में, प्राकृतिक स्वास्थ्य कोई ‘destination’ नहीं बल्कि एक ‘journey’ है। योग गुरु अग्रवाल के सुझावों को मानकर हम न केवल अपनी ‘longevity’ बढ़ा सकते हैं, बल्कि जीवन की गुणवत्ता (Quality of Life) में भी सुधार कर सकते हैं। योग, संयमित आहार और सकारात्मक सोच ही वो तीन चाबियां हैं जो आजीवन स्वास्थ्य के द्वार खोलती हैं।
आज ही संकल्प लें कि आप अपनी लाइफस्टाइल में कम से कम दो ‘natural habits’ शामिल करेंगे। याद रखें, एक स्वस्थ शरीर में ही एक स्वस्थ मस्तिष्क का वास होता है। प्राकृतिक स्वास्थ्य को अपनाएं और दवाइयों पर अपनी निर्भरता को खत्म करें।
डिस्क्लेमर: यह लेख योग गुरु अग्रवाल के विचारों और सामान्य प्राकृतिक चिकित्सा सिद्धांतों पर आधारित है। किसी भी बड़े बदलाव से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।
