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तकनीकी क्रांति: अनाज से लेकर बिजली तक, प्रह्लाद जोशी ने बताया कैसे बचे ₹250 करोड़

  • Highlights: इस आर्टिकल में क्या है?
  • केन्द्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी का टेक्नोलॉजी पर बड़ा खुलासा।
  • अनाज वितरण और बिजली उत्पादन में तकनीकी सुधार।
  • सालाना 250 करोड़ रुपये की सरकारी बचत का पूरा गणित।
  • कैसे डिजिटल इंडिया से आम आदमी को मिल रहा है फायदा।

तकनीकी क्रांति आज के समय में भारत की प्रगति का सबसे बड़ा पिलर बन चुकी है। हाल ही में केन्द्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने एक महत्वपूर्ण संबोधन में इस बात पर जोर दिया कि कैसे टेक्नोलॉजी का सही इस्तेमाल न केवल सिस्टम को पारदर्शी बना रहा है, बल्कि सरकारी खजाने को भी भारी बचत दे रहा है। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि अनाज (Food Grains) के मैनेजमेंट से लेकर बिजली (Electricity) के डिस्ट्रीब्यूशन तक, सरकार अब अत्याधुनिक तकनीकों का सहारा ले रही है, जिससे हर साल लगभग 250 करोड़ रुपये की बचत हो रही है। यह कोई छोटी रकम नहीं है, बल्कि यह वह पैसा है जिसे अब देश के अन्य विकास कार्यों में लगाया जा सकता है।

टेक्नोलॉजी और गवर्नेंस का नया संगम

जब हम तकनीकी क्रांति की बात करते हैं, तो इसका सीधा मतलब होता है प्रोसेस को सरल और भ्रष्टाचार मुक्त बनाना। प्रह्लाद जोशी ने ज़ी बिजनेस के साथ बातचीत में बताया कि पहले के समय में सप्लाई चेन में काफी लीकेज होती थी। चाहे वह राशन की दुकानों तक अनाज पहुँचाना हो या फिर पावर ग्रिड के जरिए बिजली की सप्लाई। बिचौलियों और पुराने सिस्टम की वजह से काफी बर्बादी होती थी। लेकिन अब, मोदी सरकार ने ‘डिजिटल इंडिया’ विजन के तहत हर सेक्टर को डिजिटाइज कर दिया है। Digital India के माध्यम से आज हर ट्रांजैक्शन और हर दाने का हिसाब रखा जा रहा है।

अनाज के क्षेत्र में तकनीकी क्रांति का असर

भारत दुनिया का सबसे बड़ा अनाज उत्पादक और उपभोक्ता देशों में से एक है। प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना जैसी स्कीमों के जरिए करोड़ों लोगों को खाना मिलता है। मंत्री जी ने बताया कि पहले राशन की कालाबाजारी एक बड़ी समस्या थी। लेकिन अब, अनाज के गोदामों में स्मार्ट मॉनिटरिंग सिस्टम और ई-पीओएस (e-PoS) मशीनों के इस्तेमाल से तकनीकी क्रांति ने इस लीकेज को पूरी तरह बंद कर दिया है। बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन की वजह से अब केवल असली हकदार को ही अनाज मिलता है। इस सुधार ने अकेले फूड सप्लाई चेन में करोड़ों रुपये बचाए हैं।

बिजली क्षेत्र में स्मार्ट ग्रिड और एफिशिएंसी

बिजली सेक्टर में भी तकनीकी क्रांति ने गेम चेंज कर दिया है। प्रह्लाद जोशी, जो कोयला और खान मंत्रालय के साथ-साथ रिन्यूएबल एनर्जी की भी समझ रखते हैं, उन्होंने बताया कि स्मार्ट ग्रिड और स्मार्ट मीटरिंग ने बिजली की चोरी और ट्रांसमिशन लॉस को कम कर दिया है। पहले बिजली का बिल बनाने से लेकर उसकी वसूली तक में काफी गड़बड़ियां होती थीं। अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डेटा एनालिटिक्स के जरिए यह पता लगाया जा सकता है कि बिजली की खपत कहाँ ज्यादा है और कहाँ फिजूलखर्ची हो रही है। इस ऑटोमेशन की वजह से सरकार को भारी बचत हो रही है।

250 करोड़ रुपये की बचत का ब्रेकडाउन

मंत्री जी के अनुसार, यह 250 करोड़ रुपये केवल एक शुरुआत है। तकनीकी क्रांति के जरिए जो बचत हो रही है, उसे निम्नलिखित क्षेत्रों में देखा जा सकता है:

सेक्टरतकनीक का नामबचत का मुख्य कारण
कृषि एवं अनाजe-PoS, स्मार्ट टैगिंगलीकेज और चोरी में कमी
ऊर्जा (बिजली)Smart Meters, AI Gridट्रांसमिशन लॉस में गिरावट
डायरेक्ट बेनिफिटDBT (Direct Benefit Transfer)बिचौलियों का खात्मा
लॉजिस्टिक्सGPS Trackingफ्यूल और समय की बचत

Digital Transformation और आम आदमी

यह समझना जरूरी है कि यह तकनीकी क्रांति केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं है। जब सरकार 250 करोड़ रुपये बचाती है, तो इसका मतलब है कि टैक्सपेयर्स का पैसा सही जगह खर्च हो रहा है। आज एक किसान अपने मोबाइल पर यह देख सकता है कि उसकी फसल का पैसा कब आएगा। एक आम नागरिक अपने स्मार्ट मीटर से अपनी बिजली की खपत को कंट्रोल कर सकता है। TimesNews360 की रिपोर्ट के अनुसार, भारत की यह डिजिटल छलांग दुनिया के कई विकसित देशों के लिए भी एक केस स्टडी बन गई है।

आत्मनिर्भर भारत और भविष्य की राह

प्रह्लाद जोशी ने अपने बयान में इस बात पर भी जोर दिया कि भविष्य में ड्रोन टेक्नोलॉजी और ब्लॉकचेन का इस्तेमाल अनाज और खनिज संपदा की सुरक्षा के लिए किया जाएगा। तकनीकी क्रांति का अगला चरण 5G के साथ जुड़कर और भी बड़ा होने वाला है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार का लक्ष्य केवल टेक्नोलॉजी को अपनाना नहीं है, बल्कि उसे अफोर्डेबल और एक्सेसिबल बनाना भी है।

खानों (Mines) में भी अब रडार और सेंसर्स का उपयोग हो रहा है ताकि माइनिंग ऑपरेशंस को सुरक्षित और एफिशिएंट बनाया जा सके। जब माइनिंग में एफिशिएंसी आती है, तो कच्चे माल की कीमत कम होती है, जिसका फायदा सीधे तौर पर इंडस्ट्री और फिर अंत में कंज्यूमर को मिलता है। तकनीकी क्रांति ने यहाँ भी अपनी धाक जमाई है।

चुनौतियां और उनका समाधान

बेशक, इस रास्ते में चुनौतियां भी कम नहीं हैं। साइबर सुरक्षा (Cyber Security) और डिजिटल लिटरेसी अभी भी एक बड़ा विषय है। लेकिन मंत्री जी का मानना है कि जैसे-जैसे लोग तकनीक के साथ सहज हो रहे हैं, ये समस्याएं कम होती जा रही हैं। सरकार लगातार वर्कशॉप और ट्रेनिंग प्रोग्राम्स के जरिए कर्मचारियों और आम जनता को इस तकनीकी क्रांति का हिस्सा बना रही है। डिजिटल डिवाइड को कम करने के लिए ग्रामीण इलाकों में इंटरनेट कनेक्टिविटी पर भी युद्धस्तर पर काम हो रहा है।

निष्कर्ष: एक नई सुबह की शुरुआत

अंत में, प्रह्लाद जोशी का यह बयान कि सरकार हर साल 250 करोड़ रुपये बचा रही है, भारत की बदलती तस्वीर को दर्शाता है। यह केवल बचत नहीं है, बल्कि यह सिस्टम के प्रति जनता के भरोसे की जीत है। तकनीकी क्रांति ने यह साबित कर दिया है कि अगर इच्छाशक्ति हो, तो टेक्नोलॉजी के माध्यम से किसी भी जटिल समस्या का समाधान निकाला जा सकता है। अनाज की एक-एक बोरी और बिजली की एक-एक यूनिट का हिसाब अब सुरक्षित है।

भारत अब केवल एक उपभोक्ता देश नहीं रहा, बल्कि वह टेक्नोलॉजी का निर्माता भी बन रहा है। प्रह्लाद जोशी के अनुसार, आने वाले सालों में यह बचत 250 करोड़ से बढ़कर हजारों करोड़ में तब्दील हो जाएगी, क्योंकि जैसे-जैसे सिस्टम मैच्योर होगा, उसकी एफिशिएंसी और बढ़ेगी। यह तकनीकी क्रांति ही है जो भारत को 2047 तक एक विकसित राष्ट्र बनाने के सपने को सच करेगी।

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