- Highlights: इस आर्टिकल में क्या है?
- ग्वालियर मेला में ₹3000 करोड़ से अधिक का ऐतिहासिक कारोबार।
- ऑटोमोबाइल सेक्टर बना सबसे बड़ा प्लेयर, आरटीओ छूट का मिला जबरदस्त फायदा।
- पिछले साल के ₹1200 करोड़ के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ते हुए नया बेंचमार्क सेट किया।
- मेले का औपचारिक समापन और भविष्य की उम्मीदें।
ग्वालियर मेला ने इस साल इतिहास रच दिया है। मध्य प्रदेश के ग्वालियर में आयोजित ऐतिहासिक व्यापार मेले ने इस बार अपने पिछले सभी रिकॉर्ड्स को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया है। व्यापार के नजरिए से देखें तो इस साल का टर्नओवर 3000 करोड़ रुपये के आंकड़े को भी पार कर गया है। यह न केवल ग्वालियर के लिए बल्कि पूरे मध्य प्रदेश की इकोनॉमी के लिए एक बहुत बड़ी उपलब्धि है। मेले के औपचारिक समापन के दौरान व्यापारियों और आयोजकों के चेहरे पर खुशी साफ देखी जा सकती थी, क्योंकि इस बार की ‘Business Vibe’ पहले से कहीं ज्यादा स्ट्रॉन्ग थी।
ग्वालियर मेला: एक व्यापारिक महाकुंभ
ग्वालियर मेला केवल एक मनोरंजन का साधन नहीं है, बल्कि यह उत्तर भारत के सबसे बड़े व्यापारिक आयोजनों में से एक है। महाराजा माधवराव सिंधिया द्वारा शुरू की गई यह परंपरा आज एक विशाल बिजनेस हब बन चुकी है। इस साल मेले की सफलता का सबसे बड़ा श्रेय राज्य सरकार द्वारा रोड टैक्स में दी गई 50% की छूट को जाता है। इसी छूट की वजह से ग्वालियर मेला में गाड़ियों की बिक्री ने आसमान छू लिया।
टाइम्स न्यूज़ 360 की रिपोर्ट के अनुसार, मेले में न केवल स्थानीय लोग बल्कि पड़ोसी राज्यों जैसे उत्तर प्रदेश, राजस्थान और दिल्ली से भी खरीदार पहुंचे। मेले का यह ‘Grand Success’ मॉडल अब दूसरे शहरों के लिए भी एक मिसाल बन गया है। अगर आप व्यापार और निवेश की ऐसी ही और खबरें पढ़ना चाहते हैं, तो TimesNews360 पर विजिट करें।
ऑटोमोबाइल सेक्टर की रिकॉर्ड तोड़ सेल्स
इस साल ग्वालियर मेला में अगर कोई सेक्टर सबसे ज्यादा चमका है, तो वह है ऑटोमोबाइल। मेले में टू-व्हीलर से लेकर लग्जरी फोर-व्हीलर तक की भारी डिमांड देखी गई। सरकार ने जो आरटीओ रजिस्ट्रेशन में 50% की छूट दी थी, उसने गेम चेंजर की तरह काम किया। लोगों ने महीनों पहले से अपनी गाड़ियों की बुकिंग रोक रखी थी ताकि वे मेले में आकर खरीदारी कर सकें।
| सेक्टर | अनुमानित व्यापार (करोड़ में) | ग्रोथ (पिछले वर्ष की तुलना में) |
|---|---|---|
| ऑटोमोबाइल | ₹2200+ करोड़ | लगभग 100% |
| इलेक्ट्रॉनिक्स & होम एप्लायंसेस | ₹400+ करोड़ | 40% |
| फर्नीचर & गारमेंट्स | ₹250+ करोड़ | 30% |
| फूड & झूला सेक्टर | ₹150+ करोड़ | 25% |
ऊपर दिए गए आंकड़ों से साफ है कि ग्वालियर मेला में ऑटोमोबाइल सेक्टर का दबदबा रहा। अकेले इस सेक्टर ने ही करीब 2200 करोड़ से ज्यादा का बिजनेस किया है, जो अपने आप में एक मिसाल है।
क्यों खास रहा इस बार का ग्वालियर मेला?
इस बार मेले की सफलता के पीछे कई महत्वपूर्ण कारण रहे हैं। सबसे पहले तो मेले की समय सीमा को बढ़ाया जाना। भारी भीड़ और व्यापारियों की मांग को देखते हुए सरकार ने मेले की अवधि को विस्तार दिया, जिससे ‘Last Minute Shopping’ करने वालों को भरपूर मौका मिला।
इसके अलावा, मेले की सुरक्षा व्यवस्था और ‘Visitor Management’ भी काफी प्रोफेशनल रही। ग्वालियर मेला में इस बार सीसीटीवी कैमरों और ड्रोन से निगरानी रखी गई, जिससे परिवार के साथ आने वाले लोगों को एक सुरक्षित माहौल मिला। स्थानीय प्रशासन और ‘Mela Authority’ ने इस बार इंफ्रास्ट्रक्चर पर भी काफी काम किया था। आप मेले के आधिकारिक इतिहास के बारे में अधिक जानकारी Wikipedia पर देख सकते हैं।
इलेक्ट्रॉनिक्स और घरेलू सामानों का क्रेज
सिर्फ गाड़ियां ही नहीं, बल्कि इलेक्ट्रॉनिक्स बाजार में भी ग्वालियर मेला ने अपनी धमक दिखाई। नामी कंपनियों जैसे LG, Samsung, और Sony ने अपने बड़े शोरूम यहां लगाए थे। एक्सचेंज ऑफर्स और मेला डिस्काउंट्स ने ग्राहकों को अपनी ओर आकर्षित किया। वाशिंग मशीन, रेफ्रिजरेटर और स्मार्ट टीवी की बिक्री में भारी उछाल देखा गया। मिडिल क्लास परिवारों के लिए यह मेला एक उत्सव की तरह था जहां वे साल भर की अपनी जरूरत का सामान किफायती दामों पर खरीद सके।
लोकल आर्टिस्ट्स और हस्तशिल्प को मिला प्लेटफॉर्म
ग्वालियर मेला का एक और खूबसूरत पहलू इसका सांस्कृतिक और हस्तशिल्प बाजार है। ‘शिल्प बाजार’ में देश के कोने-कोने से आए कारीगरों ने अपने हुनर का प्रदर्शन किया। कश्मीर की पश्मीना शॉल से लेकर सहारनपुर के लकड़ी के फर्नीचर तक, सब कुछ एक ही छत के नीचे उपलब्ध था। इससे न केवल बड़े ब्रांड्स को बल्कि छोटे व्यापारियों और ग्रामीण कारीगरों को भी एक बड़ा मार्केट मिला।
आर्थिक प्रभाव और भविष्य की चुनौतियां
3000 करोड़ का यह आंकड़ा साबित करता है कि टायर-2 शहरों में कंजम्पशन पावर कितनी तेजी से बढ़ रही है। ग्वालियर मेला ने शहर की लोकल इकोनॉमी को एक जबरदस्त बूस्ट दिया है। होटल इंडस्ट्री, ट्रांसपोर्टेशन और डेली वेज वर्कर्स को इस मेले से महीनों का रोजगार मिला।
हालांकि, इतनी बड़ी सफलता के साथ कुछ चुनौतियां भी सामने आईं। ट्रैफिक जाम और पार्किंग की समस्या एक बड़ा सिरदर्द बनी रही। भविष्य में अगर ग्वालियर मेला को और बड़े स्तर पर ले जाना है, तो प्रशासन को पार्किंग के लिए मल्टी-लेवल व्यवस्था और पब्लिक ट्रांसपोर्ट को और भी मजबूत करना होगा। व्यापारियों का कहना है कि अगर टैक्स छूट की घोषणा साल की शुरुआत में ही कर दी जाए, तो वे और भी बेहतर तैयारी कर सकते हैं।
समापन समारोह की झलकियां
मेले के औपचारिक समापन समारोह में कई बड़े नेता और अधिकारी शामिल हुए। इस दौरान बेहतरीन प्रदर्शन करने वाले व्यापारियों को सम्मानित भी किया गया। समापन के समय आसमान आतिशबाजी से नहा उठा और लोगों की आंखों में अगले साल का इंतजार साफ दिख रहा था। ग्वालियर मेला प्रशासन ने वादा किया है कि अगले साल सुविधाएं और भी ‘Hi-tech’ होंगी और व्यापार का लक्ष्य 5000 करोड़ रखा जाएगा।
निष्कर्ष: ग्वालियर मेला का नया युग
कुल मिलाकर देखा जाए तो ग्वालियर मेला 2024 एक बड़ी ‘Success Story’ रहा है। यह केवल एक मेला नहीं, बल्कि मध्य प्रदेश की बदलती आर्थिक तस्वीर का एक आईना है। 3000 करोड़ का टर्नओवर यह बताने के लिए काफी है कि ग्वालियर में बिजनेस की अपार संभावनाएं हैं।
ग्वालियर मेला ने इस साल जो कीर्तिमान स्थापित किए हैं, वे सालों तक याद रखे जाएंगे। व्यापारियों के लिए यह सीजन मुनाफे की बारिश लेकर आया, तो ग्राहकों के लिए बचत का महापर्व। अब देखना यह होगा कि क्या अगले साल ग्वालियर अपने ही इस ‘Mega Record’ को तोड़ पाता है या नहीं। व्यापार की दुनिया में ग्वालियर का कद अब और भी बढ़ गया है, और इसका पूरा श्रेय यहां के मेहनती व्यापारियों और जागरूक ग्राहकों को जाता है।
अगर आप भी इस मेले का हिस्सा रहे हैं, तो हमें कमेंट्स में बताएं कि आपका अनुभव कैसा रहा और आपने मेले से क्या खास खरीदा!
