Highlights: इस आर्टिकल में क्या है?
- नहाते वक्त यूरिन पास करने की आदत पर प्रेमानंद महाराज का दृष्टिकोण।
- क्या विज्ञान इस आदत को सेहत के लिए बुरा मानता है?
- पेल्विक फ्लोर मसल्स और आपके ब्लैडर पर पड़ने वाला प्रभाव।
- हाइजीन और इन्फेक्शन का खतरा: मिथक बनाम हकीकत।
- पेशाब की आदत सुधारने के लिए डॉक्टर्स की सलाह।
पेशाब की आदत हमारी लाइफस्टाइल का एक ऐसा हिस्सा है जिस पर हम अक्सर खुलकर बात नहीं करते। लेकिन हाल ही में सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ जिसमें मशहूर संत प्रेमानंद महाराज ने नहाते समय पेशाब करने की आदत को लेकर कड़ी चेतावनी दी। उन्होंने इसे न केवल आध्यात्मिक दृष्टि से गलत बताया, बल्कि इसे दरिद्रता और अशुद्धि का कारण भी माना। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि मॉडर्न मेडिकल साइंस और डॉक्टर्स इस बारे में क्या सोचते हैं? क्या यह सिर्फ एक सांस्कृतिक वर्जना (taboo) है या इसके पीछे कोई ठोस साइंटिफिक कारण भी है? आज के इस डीप-डाइव एनालिसिस में हम पेशाब की आदत से जुड़े हर पहलू को डिकोड करेंगे।
प्रेमानंद महाराज ने क्या कहा?
भारत के आध्यात्मिक जगत में प्रेमानंद महाराज की बातों को बहुत गंभीरता से लिया जाता है। उनके अनुसार, जब हम नहाते समय बाथरूम में खड़े-खड़े या शावर के नीचे यूरिन पास करते हैं, तो यह हमारे संस्कारों और शुद्धि की प्रक्रिया के खिलाफ है। महाराज जी का कहना है कि नहाना शरीर को पवित्र करने की प्रक्रिया है, और उसी समय मल-मूत्र का त्याग करना उस पवित्रता को भंग करता है। शास्त्रों के अनुसार, इस पेशाब की आदत को ‘दरिद्रता’ बुलाने वाला व्यवहार माना गया है। महाराज जी की यह सलाह उन लाखों लोगों के लिए एक वेक-अप कॉल है जो इसे एक सामान्य बात समझते थे।
विज्ञान और साइकोलॉजी: क्या कहता है मेडिकल रिसर्च?
डॉक्टर्स और फिजियोथेरेपिस्ट्स के पास इस विषय पर एक अलग लेकिन दिलचस्प नजरिया है। जब हम शावर के नीचे खड़े होते हैं और बहते हुए पानी की आवाज सुनते हैं, तो हमारा दिमाग उसे यूरिनेशन के साथ जोड़ लेता है। इसे ‘पावलोवियन रिस्पांस’ (Pavlovian Response) कहा जाता है।
अगर आपकी पेशाब की आदत ऐसी बन गई है कि आप हर बार पानी की आवाज सुनते ही यूरिन पास करने लगते हैं, तो यह आपके ब्लैडर के लिए खतरनाक हो सकता है। डॉक्टर्स का मानना है कि ऐसा करने से आपका ब्लैडर दिमाग को गलत सिग्नल भेजने लगता है। धीरे-धीरे, जब भी आप हाथ धोएंगे या बर्तन साफ करेंगे और पानी की आवाज सुनेंगे, तो आपको तुरंत बाथरूम भागने की जरूरत महसूस होगी। इसे ‘अर्ज इनकॉन्टिनेंस’ (Urge Incontinence) की शुरुआत माना जा सकता है।
पेल्विक फ्लोर मसल्स पर असर
नहाते समय पेशाब करने की एक और बड़ी समस्या पोस्चर (Posture) से जुड़ी है। महिलाएं आमतौर पर बैठकर यूरिन पास करती हैं, जो उनके पेल्विक फ्लोर मसल्स को रिलैक्स करने का सही तरीका है। लेकिन शावर के नीचे खड़े होकर यूरिन पास करने से पेल्विक फ्लोर मसल्स पूरी तरह रिलैक्स नहीं हो पातीं। इस गलत पेशाब की आदत की वजह से ब्लैडर पूरी तरह खाली नहीं होता, जो आगे चलकर इन्फेक्शन या ब्लैडर स्टोन्स का कारण बन सकता है।
हाइजीन और इन्फेक्शन का डर: कितना सच, कितना झूठ?
अक्सर लोग तर्क देते हैं कि यूरिन स्टेराइल (Sterile) होता है, यानी इसमें कीटाणु नहीं होते। लेकिन यह पूरी तरह सच नहीं है। यूरिन जब शरीर से बाहर निकलता है, तो उसमें कई तरह के बैक्टीरिया हो सकते हैं। अगर आप किसी और के साथ शावर शेयर कर रहे हैं, तो यह दूसरों के लिए इन्फेक्शन का कारण बन सकता है। खासतौर पर एथलीट फुट या पैर के फंगल इन्फेक्शन वाले मामलों में यह स्थिति और बिगड़ सकती है। अपनी पेशाब की आदत को कंट्रोल करना सोशल मैनर्स का भी हिस्सा है।
| पहलू | प्रेमानंद महाराज की राय | डॉक्टर्स की राय |
|---|---|---|
| शुद्धि (Purity) | अत्यधिक महत्वपूर्ण, इसे भंग न करें। | हाइजीन के नजरिए से इसे टाला जाना चाहिए। |
| ब्लैडर हेल्थ | मानसिक अनुशासन से जुड़ी है। | खड़े होकर यूरिन पास करना मसल्स के लिए बुरा है। |
| दिमाग पर असर | संस्कारों का क्षय होता है। | कंडीशन्ड रिफ्लेक्स (Conditioned Reflex) पैदा होता है। |
| संकेत | दरिद्रता का लक्षण। | ब्लैडर कंट्रोल खोने का शुरुआती संकेत। |
कैसे बदलें अपनी पेशाब की आदत?
अगर आप सालों से ऐसा करते आ रहे हैं, तो इसे बदलना रातों-रात मुमकिन नहीं होगा। लेकिन कुछ स्टेप्स उठाकर आप अपनी हेल्थ सुधार सकते हैं:
- नहाने से पहले जाएं बाथरूम: शावर चालू करने से पहले ब्लैडर को खाली करने की कोशिश करें। यह सबसे अच्छी पेशाब की आदत है।
- दिमाग को ट्रेन करें: अगर शावर के दौरान यूरिन का प्रेशर महसूस हो, तो उसे रोकें और शावर खत्म होने के बाद ही टॉयलेट का इस्तेमाल करें।
- कीगल एक्सरसाइज: अपने पेल्विक फ्लोर को मजबूत बनाने के लिए कीगल एक्सरसाइज करें, ताकि आपको ‘अर्ज’ (Urge) पर कंट्रोल रहे।
- साफ-सफाई का ध्यान: अगर कभी गलती से ऐसा हो जाए, तो बाथरूम को अच्छी तरह कीटाणुनाशक (Disinfectant) से साफ करें।
स्वास्थ्य से जुड़ी अधिक जानकारी के लिए आप Healthline की रिसर्च पढ़ सकते हैं। साथ ही, लाइफस्टाइल और हेल्थ से जुड़े अन्य आर्टिकल्स के लिए हमारी वेबसाइट TimesNews360 पर विजिट करते रहें।
क्या यह किसी बड़ी बीमारी का संकेत है?
बार-बार या गलत समय पर पेशाब की आदत कभी-कभी डायबिटीज, प्रोस्टेट की समस्या (पुरुषों में) या यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन (UTI) का शुरुआती लक्षण भी हो सकती है। अगर आपको पेशाब रोकने में बहुत ज्यादा कठिनाई होती है या बार-बार बाथरूम जाना पड़ता है, तो इसे केवल आध्यात्मिक या सामान्य आदत मानकर नजरअंदाज न करें। एक यूरोलॉजिस्ट से सलाह लेना अनिवार्य है।
निष्कर्ष: अध्यात्म और विज्ञान का संगम
अंत में, चाहे हम प्रेमानंद महाराज की आध्यात्मिक बातों को देखें या मेडिकल साइंस के तर्कों को, दोनों ही इस बात पर सहमत हैं कि नहाते समय यूरिन पास करना एक अच्छी पेशाब की आदत नहीं है। जहां महाराज जी इसे आत्मिक अनुशासन और मर्यादा से जोड़ते हैं, वहीं विज्ञान इसे फिजिकल हेल्थ और मसल कंट्रोल से जोड़ता है। शरीर को मंदिर की तरह मानना और उसकी गरिमा बनाए रखना ही बेहतर सेहत की निशानी है।
इसलिए, अगली बार जब आप शावर के नीचे हों, तो अपनी इंद्रियों पर नियंत्रण रखें और एक स्वस्थ दिनचर्या की ओर कदम बढ़ाएं। आपकी पेशाब की आदत आपके व्यक्तित्व और आपकी सेहत का आइना है, इसे धुंधला न होने दें।
