Highlights: इस आर्टिकल में क्या है?
- बॉडी हीट यानी शरीर की गर्मी से बिजली बनाने का नया तरीका।
- थर्मोइलेक्ट्रिक जनरेटर (TEG) कैसे काम करते हैं?
- स्मार्टवॉच और फिटनेस बैंड्स के लिए गेम-चेंजर साबित होगी ये टेक।
- फ्यूचर में बैटरी की समस्या से मिलेगी परमानेंट छुट्टी।
बॉडी हीट का इस्तेमाल करके अब आप अपने स्मार्टफोन और स्मार्टवॉच को चार्ज कर सकेंगे। क्या आपने कभी सोचा है कि जिस गर्मी से आप परेशान होकर पंखा या एसी ढूंढते हैं, वही गर्मी आपके गैजेट्स की बैटरी फुल कर सकती है? जी हां, यह कोई साइंस-फिक्शन फिल्म की कहानी नहीं है, बल्कि एक हकीकत बनती जा रही टेक्नोलॉजी है। वैज्ञानिकों ने ऐसी डिवाइसेस और वियरेबल्स तैयार कर लिए हैं जो इंसान के शरीर से निकलने वाली हीट को इलेक्ट्रिसिटी में बदलने की ताकत रखते हैं।
बॉडी हीट: एक अनदेखा पावर हाउस
बॉडी हीट असल में ऊर्जा का एक बहुत बड़ा सोर्स है। जब हम कोई काम करते हैं, चलते हैं या फिर सिर्फ बैठे भी होते हैं, तो हमारा मेटाबॉलिज्म लगातार गर्मी पैदा करता है। अभी तक यह गर्मी सिर्फ वातावरण में बेकार चली जाती थी। लेकिन अब इंजीनियर्स ऐसी ‘थर्मोइलेक्ट्रिक’ मटेरियल वाली रिंग्स, रिस्टबैंड्स और पैचेस डेवलप कर रहे हैं, जो इस वेस्ट एनर्जी को कैप्चर कर सकें।
टाइम्स न्यूज़ 360 (timesnews360.com) हमेशा से आपको भविष्य की टेक्नोलॉजी से रूबरू कराता रहा है। इस तकनीक के आने के बाद आपको बार-बार चार्जर ढूंढने की जरूरत नहीं पड़ेगी। खासकर उन लोगों के लिए जो ट्रैकिंग या एडवेंचर ट्रिप्स पर जाते हैं, उनके लिए यह वरदान साबित हो सकता है।
कैसे काम करता है ये जादू? (The Science Behind It)
इस पूरी प्रक्रिया के पीछे जो विज्ञान काम करता है, उसे ‘सीबेक इफेक्ट’ (Seebeck Effect) कहा जाता है। इसे समझने के लिए हमें थोड़ा गहराई में जाना होगा। जब दो अलग-अलग तरह के कंडक्टर्स को एक साथ जोड़ा जाता है और उनके बीच तापमान का अंतर (Temperature Difference) होता है, तो वहां बिजली पैदा होती है।
आपकी स्किन का तापमान लगभग 37 डिग्री सेल्सियस होता है, जबकि बाहर की हवा अक्सर ठंडी होती है। इसी टेंपरेचर डिफरेंस का फायदा बॉडी हीट को बिजली में बदलने वाले जनरेटर उठाते हैं। जितना ज्यादा तापमान में फर्क होगा, उतनी ही ज्यादा बिजली पैदा होगी। रिसर्च के मुताबिक, Nature जैसी प्रतिष्ठित साइंस जर्नल्स में छपे शोध बताते हैं कि आने वाले समय में ये वियरेबल्स इतने पावरफुल हो जाएंगे कि छोटे मेडिकल सेंसर्स को चलाने के लिए किसी बाहरी बैटरी की जरूरत ही नहीं होगी।
थर्मोइलेक्ट्रिक जनरेटर्स (TEG) की बनावट
ये डिवाइस बहुत ही पतली और लचीली होती हैं। इन्हें बनाने के लिए खास तरह के सेमीकंडक्टर मटेरियल का इस्तेमाल किया जाता है।
| फीचर | ट्रेडिशनल बैटरी | बॉडी हीट (TEG) टेक्नोलॉजी |
|---|---|---|
| पावर सोर्स | केमिकल एनर्जी | शरीर की गर्मी |
| लाइफस्पैन | 2-3 साल | 10-15 साल (लॉन्ग लास्टिंग) |
| पर्यावरण पर असर | प्रदूषणकारी (लिथियम) | इको-फ्रेंडली |
| चार्जिंग समय | 1-2 घंटे | रियल-टाइम (हमेशा चालू) |
गैजेट्स की दुनिया में क्रांति
बॉडी हीट का इस्तेमाल सबसे पहले स्मार्टवॉच और फिटनेस ट्रैकर्स में दिखने वाला है। आज के समय में स्मार्टवॉच की सबसे बड़ी समस्या उसका बैटरी बैकअप है। Apple Watch हो या Samsung Galaxy Watch, इन्हें हर एक या दो दिन में चार्ज करना पड़ता है। लेकिन अगर इनमें एक छोटा सा ‘थर्मोइलेक्ट्रिक पैच’ लगा दिया जाए, तो जब तक ये घड़ी आपकी कलाई पर बंधी है, यह खुद-ब-खुद चार्ज होती रहेगी।
इसके अलावा, मेडिकल फील्ड में भी इसके कमाल के फायदे हैं। पेसमेकर जैसे डिवाइस जो दिल की धड़कन को कंट्रोल करते हैं, उनकी बैटरी बदलने के लिए कई बार सर्जरी करनी पड़ती है। अगर पेसमेकर बॉडी हीट से चलने लगे, तो मरीज को बार-बार अस्पताल के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे।
चुनौतियां और भविष्य की राह
हालांकि, यह तकनीक अभी अपने शुरुआती दौर में है। सबसे बड़ी चुनौती है ‘एफिशिएंसी’। वर्तमान में बॉडी हीट से इतनी बिजली नहीं बनती कि एक बड़े स्मार्टफोन को तेजी से चार्ज किया जा सके। अभी ये तकनीक सिर्फ छोटे सेंसर्स और लो-पावर डिवाइसेस के लिए फिट है।
लेकिन रिसर्चर्स अब ऐसे नैनो-मटेरियल्स पर काम कर रहे हैं जो कम गर्मी में भी ज्यादा वोल्टेज पैदा कर सकें। चीन और अमेरिका की कई यूनिवर्सिटीज ने ऐसे ‘फ्लेक्सिबल फैब्रिक’ भी बनाए हैं जिन्हें आप टी-शर्ट की तरह पहन सकते हैं। यह टी-शर्ट धूप और आपके शरीर की गर्मी दोनों से बिजली बनाएगी।
क्या हमें वाकई चार्जर से छुटकारा मिलेगा?
आने वाले 5 से 10 सालों में बॉडी हीट हमारी लाइफस्टाइल का एक अहम हिस्सा बन सकती है। इमेजिन कीजिए कि आप रनिंग कर रहे हैं और आपके पसीने और शरीर की गर्मी से आपके ईयरबड्स चार्ज हो रहे हैं। यह न केवल कूल है, बल्कि सस्टेनेबल भी है।
बॉडी हीट टेक्नोलॉजी के आने से हम ई-वेस्ट को भी कम कर सकते हैं। हर साल करोड़ों बैटरियां कचरे में फेंक दी जाती हैं जो जमीन और पानी को जहरीला बनाती हैं। अगर हम शरीर की नेचुरल एनर्जी का इस्तेमाल करना शुरू कर दें, तो हम एक क्लीन और ग्रीन फ्यूचर की तरफ बढ़ेंगे।
निष्कर्ष
अंत में, यह कहना गलत नहीं होगा कि इंसान का शरीर एक चलता-फिरता पावर प्लांट है। बॉडी हीट से गैजेट्स चार्ज करने की ये टेक्नोलॉजी आने वाले समय में टेक इंडस्ट्री को पूरी तरह बदल कर रख देगी। हालांकि अभी हमें थोड़ा इंतजार करना होगा जब तक कि यह आम जनता के लिए किफायती दामों पर उपलब्ध न हो जाए। तब तक के लिए, अगली बार जब आपको गर्मी लगे, तो बस ये सोचिए कि काश आपके पास वो मैजिकल रिंग होती जो इस गर्मी को आपके फोन की बैटरी में बदल देती!
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